गाँव-गाँव साइकिल में चलती-फिरती शराब दुकानें
भाटापारा। शराबबंदी का विचार। संकेत भंडारण का। अवैध शराब बिक्री से जुड़ा क्षेत्र तैयारी की योजना तो बना रहा है, साथ ही सरकार के फैसले की राह भी देख रहा है।
हलचल देखी जा रही है, उनके बीच जो शराब की अवैध बिक्री करते हैं। मात्रा भले ही कम हो लेकिन पकड़े रोज जा रहे हैं। यह वर्ग सरकार के शराबबंदी पर विचार के फैसले पर न केवल गहरी नजर रखे हुए हैं बल्कि बाद की स्थितियों में भी कारोबार की राह में आने वाली संभावित अड़चनों और उससे निपटने के उपाय पर मंथन कर रहा है। इसके अलावा बंद के बाद भंडारण की भी योजना पर विचार किए जाने की जानकारी आ रही है।
संकेत तैयारी के
अवैध शराब बिक्री से जुड़ा क्षेत्र, सरकार की शराबबंदी की योजना पर विचार से भौंचक्का है। उपाय के रूप में अब सुरक्षित ठिकाने की तलाश भी गुपचुप तरीके से किए जाने के संकेत मिलने लगे हैं। कुछ क्षेत्रों में तो भंडारण का किया जाना भी चालू होने की खबर आ रही है। इसमें बड़े कारोबारियों की पूरी मदद भी मिल रही है।

तैयारी यहां भी
शहर और शहर सीमा से लगे 10 किलोमीटर की परिधि में आने वाले लगभग सभी गांव में शराब का विक्रय होता है लेकिन सुरखी, रोहरा, तरेंगा, टेहका, बोड़तरा,ढाबाडीह ऐसे गांव हैं जहां यह धंधा बेखौफ संचालित होता है। इसके अलावा बाइक या साइकिल में चलती-फिरती शराब दुकानें अलग से संचालित हो रहीं हैं। यह सभी अब नए सिरे से योजना बना रही हैं ताकि काम सुचारु रुप से चलता रहे।
सबका साथ
मत पूछिए कि रोज पकड़े जा रहे हैं, फिर भी पूरी तरह बंद क्यों नहीं हो रहा है ? इस सवाल का जवाब खोजने की जहमत उठाना बेकार है कि जुआ और सट्टा क्यों बंद नहीं हो रहे हैं ? दिखावे की कार्रवाई जुआ-सट्टा पर करने के बाद जब्त मामूली रकम या अवैध शराब की कम मात्रा में जब्ती भी सवालिया निशान लगाती है लेकिन सिस्टम का साथ उस क्षेत्र को मिल रहा है जो इस तरह का अवैध कारोबार कर रहें हैं।
