काले पत्थर से बना था पौराणिक धरोहर
पुलिस को सूचना नहीं, चर्चाओं का बाजार गर्म
रतनपुर। चौंकिए नहीं, सच है। भगवान का शिवलिंग गायब हो गया है। लोगों ने देखा कि बीते दिन जिस जीर्ण-शीर्ण मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा अर्चना कर मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था वो मलबे का ढेर हो गया है। जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटाया गया तो शिवलिंग गायब मिला। घटना को लेकर शहर में तरह तरह की चर्चा है है। आखिर कहां चला गया चमकदार काले पत्थर से बना प्राचीनतम जलहरि और शिवलिंग।

छत्तीसगढ़ की प्राचीनतम राजधानी रतनपुर के रामटेकरी पहाड़ी के नीचे छप्पन एकड़ रकबे में फैला राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिक विरासत बिकमा तालाब है। इसके चारों ओर पार में कई मंदिर और मठ है। जहां शहर के लोग श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना कर दीपक जलाते हैं। इन्हीं में जीर्ण-शीर्ण मंदिर पर चमकदार चिकने काले पत्थर से बने शिवलिंग और जलहरि स्थापित था।

बीते दिनों शहर के चावल व्यवसायी की बहन ने इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा अर्चना कर मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था। सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी पूर्व पार्षद शिव मोहन बघेल ने देकर पूजा अर्चना करने की विडियो जारी की थी।

दो दिन बाद सुबह लोगों ने देखा कि जीर्ण-शीर्ण मंदिर अब मलबे का ढेर हो गया है। पहले तो लोगों को लगा कि मंदिर के पुनर्निर्माण करने के लिए मंदिर को ढहा दिया गया है। शिवलिंग के ऊपर मंदिर का मलबा होने पर लोगों ने नाराजगी जताई। मामले को लेकर पतासाजी शुरु हुई और चांवल व्यवसायी से बात की गई तो उन्होंने पूरी घटना से अनभिज्ञता जताई।

वहीं पूर्व पार्षद शिव मोहन बघेल ने जेसीबी मशीन मंगाकर मलबे को हटाया गया तो नीचे स्थापित चमकदार चिकने काले पत्थर से बने शिवलिंग और जलहरि गायब मिला। जलहरि के साथ शिवलिंग के गायब होने और मंदिर के धराशायी होकर मलबे के ढेर में बदल जाने की घटना से हड़कंप मच गया है। घटना को लेकर लोगों में तीखी नाराजगी है। फिलहाल घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई है। घटना को लेकर लोगों में तीखी नाराजगी है।
