ब्रीडिंग सीजन आक्रामक बना रहा
भाटापारा। आहट ब्रीडिंग सीजन की। आक्रामक होने लगे हैं पालतू और घुमंतू श्वान। शांत रहें, दूर भगाने की कोशिश नहीं करें। कुछ समय पश्चात ऐसे श्वान खुद- ब- खुद जगह बदल लेंगे।
घुमंतू श्वानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। अनुपात में जरूरी पोषण व्यवस्था अब कमजोर होती नजर आ रही है। उग्र हो चले श्वान इसलिए और भी ज्यादा आक्रामक हो रहे हैं क्योंकि उनके ब्रीडिंग सीजन की शुरुआत हो रही है। इसलिए अगले दो माह अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी राहगीरों और श्वान पालकों को।
आहट ब्रीडिंग सीजन की
फरवरी और मार्च के महीने श्वानों के लिए ब्रीडिंग मंथ माने जाते हैं। इस दौरान वह सामान्य से कुछ ज्यादा उग्र होते हैं। यह उग्रता तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब सही समय पर सही पोषण उपाय नहीं किए जाते। समान रूप से ऐसी ही आक्रामकता पालतू श्वानों में भी देखी जाती है। इस दौरान ज्यादा देखरेख की जरूरत होती है।इसलिए भी हो रहे आक्रामक

इसलिए भी हो रहे आक्रामक
पालतू श्वान तो ठीक हैं लेकिन घुमंतू श्वानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे खान-पान और स्थाई ठौर- ठिकानों की व्यवस्था सही नहीं मानी जा रही है। यह स्थिति भी श्वानों को आक्रामक बना रही है। इसलिए आपस में झगड़ा और झपटनेंं तथा काटने जैसी शिकायतें खूब हैं। बचाव का सिर्फ एक उपाय- शांत रहें। घबराने का प्रयास नहीं करें। कुछ समय बाद जगह बदल लेंगे ऐसे श्वान।
सही पोषण इनका भी नहीं
आबादी गौवंशों की भी बढ़ रही है लेकिन नियंत्रण में है भैंस- भैंसा की आबादी। पर जरूरी पोषण व्यवस्था दोनों के लिए भी अपेक्षित मात्रा में नहीं देखी जा रही हैं। इसलिए आक्रामकता इनमें भी बढ़त की ओर है। खास तौर पर स्ट्रीट एनिमल में यह उग्रता कुछ ज्यादा ही बन रही है। उग्रता कम करने का सिर्फ एक उपाय- करनी होगी उचित खान-पान की व्यवस्था।

बढ़ती आबादी बढ़ा रही आक्रामकता
श्वानों का ब्रीडिंग सीजन आने वाला है। इससे पहले से बढ़ी हुई आबादी में और वृद्धि होगी जबकि जरूरी पोषण आहार की कमी अपनी जगह बनी हुई है। यही वजह है कि उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ रही है।
- डॉ एस एन अग्रवाल, अतिरिक्त उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, भाटापारा
