उकसावा की कार्रवाई, तनाव न पड़ जाए भारी

रतनपुर। दुकान से निकालकर पान व्यवसायी से मारपीट करने और शराब पीने का झूठा अपराध दर्ज करने के मामले को अभी पखवाड़ा भी नहीं गुजरा है।  दो सिपाही को बली का बकरा बनाकर कथित तौर पर लाइन अटैच कर दिया गया। वहीं रतनपुर थाना पुलिस के रवैये में थोड़ा भी बदलाव होता नजर नहीं आता दिख रहा है।
पुलिस की सरकारी गाड़ी में बिना वर्दी और नेम प्लेट के कौन  गस्ती पर निकल रहे है। सरकारी गाड़ी में बैठे बिना वर्दी के लोग उकसावे की कार्रवाई करते लिख रहे है। अब उनको ये कहने का हक किसने दे दिया कि कहे कि “वो कौन सा अच्छा सामान बेच रहे हैं”। देर रात तक खुलने वाले ढाबों को बंद कराने की जुर्रत तो पुलिस के पास नहीं हैं। छोटे पान ठेले गुमटी वालों के सिर पर रात दस बजे ही सवार होकर अनर्गल बात कर उकसावे की कार्रवाई कर रही है। सभी चाहते हैं, कि देर रात तक दुकानें खुली न रहे शहर में अमन चैन बना रहे। इसके लिए शहर के व्यापारियों को भरोसे में लेकर चर्चा कर समान रुप से सभी दुकानें बंद करने आम सहमति बनाकर पहल करनी चाहिए। दुकानें बंद करने का समय तय कर शहर में इसकी मुनादी होनी चाहिए।  शहर के आसपास के ढाबे देर रात तक खुलें रहते हैं। इन पर कार्रवाई करने की हिम्मत पुलिस नहीं दिखा पा रही है।

कमजोर व्यवसायियों पर रतनपुर थाना पुलिस अपना पुरुषार्थ दिखा रही है ।  एक ही थाना क्षेत्र में  देर रात कारोबार करने के लिए अलग अलग कानून कैसे हो सकते हैं। जहां तक हाईवे की बात है वहां लगातार गाड़ियां चलती रहती है। इन गाड़ियों पर चलने वाले चालकों और मुसाफिरों की प्रसाधन व भोजन की जरुरतों को  पूरा के लिए भारतीय सड़क अधिकरण ने  एन एच में ही जगह जगह कंफर्ट सेंटर बना रखे हैं। जहां पर्याप्त पार्किंग और पूरी सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहती है। एन एच एथारिटी ही गाड़ी चालकों और मुसाफिरों को जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।  ऐसे में एन एच के किनारे संचालित ढाबों को देर रात तक खुली रखने की छुट देने को  कैसे न्याय सम्मत ठहराया जाय. … तो क्या देर रात तक खुली रखने छुट देने रंगदारी हो रही …… रंगदारी सरकारी गाड़ी में बिना सर्दी और नेम प्लेट के  …..तो समरथ क नही दोष गोसाई …. समय रहते पुलिस अपने चाल और चरित्र में व्यवहारिक बदलाव नहीं लाएगी। तो कभी भी फिर से  शहर में तनाव के हालात बनेंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी रतनपुर थाना पुलिस की ही होगी.

By MIG