उठ गई दीवार बिक गई कांग्रेसियों की जमीर … !

रेड क्रॉस की जमीन पर भूमाफियाओं की है नजर

रतनपुर। … तो शहर के सबसे पौश इलाका महामाया चौक रतनपुर स्थित उमादत्त शर्मा की करोड़ों की जमीन “अमर-अकबर” को किसने बेचीं !

महामाया चौक रतनपुर स्थित इस जमीन पर अब करोड़ों रुपए का चार मंजिला इमारत खड़ा है। जहाँ कभी इतनी ही उंचाई के विशाल छायादार इमली का वृक्ष हुआ करता था इसकी छांव पशु पक्षी, मुसाफ़िर रोजी-रोटी कमाने वाले मजदूर राहत लेते थे। इस विशाल इमली को ढहाकर बनाई गई इस इमारत को लोग अब  मिड टाऊन के नाम से जानते हैं. तो उमादत्त शर्मा की इस आबादी जमीन के मालिक अमर अकबर कैसे हो गए  …! इस पर बने भवन पर अभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का कार्यालय भी है.

कांग्रेस भवन के लिए काबिज जमीन को लेकर आए तहसीलदार के फैसले से तो यही साबित होता दिख रहा है…!  आदेश के मुताबिक ने विरासत में उमादत्त शर्मा की मिली जमीन का चार डिसमिल रकबा ही पीरदीन और राजेश को बेचा गया है। वहीं 11 डिसमिल जमीन पर अपना कब्जा होने का दावा जता रहे हैं। ऐसे में उमादत्त शर्मा की आबादी जमीन पर बनी होटल की जर्जर इमारत कब और कैसे अमर अकबर के नाम पर चला गया के भी जवाब तलाशने की जरूरत है। जो पटवारी-तहसीलदार और जमीर बेचने वाले कांग्रेसियों की पेंच में गुम हो गया है।

आजादी के बाद के अरसे तक रहा बस स्टैंड जहाँ मुसाफिरों को उमादत्त शर्मा के होटल में जलपान की सुविधा मिलती थी और स्नेह और सम्मान में लोग उन्हें उमा महराज के रूप में संबोधित करते थे। उनकी इस आबादी जमीन को उनके वारिसान ने नहीं बेची है तो अब इस जमीन के मालिक अमर अकबर कैसे हो गए…! बात निकली है तो दूर तलक जाएगी…  *thecentralnews.com* पढ़ते रहिये  और भी बहुत कुछ…