उद्यानिकी फसलों को कीट प्रकोप से बचाने की सलाह हुई जारी
भाटापारा। सब्जी की फसल ले रहे किसानों के लिए जरूरी सूचना। भाजी की सभी प्रजातियों पर रस चूसक कीट हमला कर सकते हैं। गोभी पर फफूंद की नजर पड़ चुकी है। इसलिए मौसम के खुलते ही फफूंद नाशक सहित जरूरी कीटनाशक का छिड़काव करें अन्यथा यह दोनों खतरनाक कीट फसल को तबाह कर सकते हैं।
बादल, बूंदा-बांदी और ओलावृष्टि के बाद, अब सब्जी की खेती पर कीट प्रकोप का खतरा मंडराने लगा है। फफूंद और रस चूसने वाले कीट , फसलों के करीब अपनी पहुंच बना चुके हैं। अवसर की ताक में बैठे, यह दोनों कीट इतने खतरनाक हैं कि तेजी से फैलते हैं और इस क्रिया के कारण फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब्जी की फसल लेने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की भी ताकत रखते हैं। मौसम को देखते हुए कृषि विभाग की चेतावनी के बाद अब सब्जी वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है।
भाजी में ये कीट
लाल, पालक, चौलाई, मेथी और धनिया की फसल के लिए बड़ा खतरा बनने वाले रस चूसक कीट की उपस्थिति नजर आने लगी है। यह कीट इन प्रजातियों के अलावा भाजी की दूसरी किस्मों को भी तबाह करने की क्षमता रखते हैं। बादल, बारिश और तापमान ऐसे कीट के फैलाव के लिए मददगार बन चुके हैं। इसलिए किसानों को सतत ध्यान देना होगा।
निशाने पर गोभी
फफूंद। एक ऐसा कीट जो सब्जी की सभी किस्मों पर हमला करता है। इसकी नजर फूल गोभी, पत्ता गोभी और गांठ गोभी पर लग चुकी है। तेजी से अपना प्रसार क्षेत्र बढ़ाने वाला यह कीट भी बादल, बारिश और उसके बाद के तापमान पर अपना परिवार बढ़ाता है। तीव्रता इतनी घातक होती है कि समय रहते प्रबंधन नहीं किए गए तो पूरी फसल चौपट करने में सक्षम है। लिहाजा सब्जी किसानों को सावधानी बढ़ानी होगी।
खतरे में यह भी
सेमी, बरबट्टी, ग्वार फली, टमाटर, बैंगन और हरी मिर्च पर भी नुकसान के खतरे ने दस्तक दे दी है। इसके अलावा हर उस सब्जी की फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है, जो इस मौसम में ली जाती है। इसलिए विभाग के साथ सब्जी वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम के खुलते ही, धूप की अवस्था में सही दवाओं का छिड़काव करें।
भाजी की सभी प्रजातियों के अलावा गोभी को यह मौसम नुकसान पहुंचाने वाला है। इसलिए किसान फसलों की निगरानी करें और धूप निकलते ही सही दवाओं का छिड़काव करें।
- डॉ अमित दीक्षित, डीन, उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सांकरा, दुर्ग

