बिलासपुर।  गाय का गोबर, गौमूत्र, गुड़ और मिट्टी। यह चार सुधारेंगे मिट्टी की सेहत। कम होगी खेती की लागत। बढ़ेगा फसलोत्पादन। घर पर ही तैयार की जा सकने वाली इस सामग्री को पहचान मिली है ‘जीवामृत’ के नाम से। ‌

सब्जी के खेतों में छिड़काव से मिली सफलता के बाद फलों का भी उत्पादन बढ़ा रहा है जीवामृत। परिणाम देखकर अब धान और गेंहू की खेती करने वाले किसान भी रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि रासायनिक उर्वरक अब बेहतर परिणाम देने वाले नहीं माने जा रहे हैं।

जीवामृत क्या है ?

जीवामृत गाय आधारित जैविक खाद है। इसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्व मिलाये जाते हैं। पानी की आनुपातिक मात्रा में तैयार यह मिश्रण कुछ दिनों तक खमीर उठाता है, तब इसमें सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ जाती है। यही सूक्ष्म जीव छिड़काव के जरिए खेतों में पहुंचते हैं और मिट्टी की उत्पादन क्षमता बढ़ाते हैं। अहम गुण यह है कि असर दीर्घ अवधि तक बना रहता है।

जीवामृत के फायदे

जीवामृत का छिड़काव मिट्टी में मौजूद जीवाणुओं की संख्या न केवल बढ़ाता है बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बनाए रखता है। जड़ों को मजबूती मिलने से पौधों की तेज बढ़वार और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि भी प्रमाणित हुई है। कुछ समय के अंतराल में जीवामृत का छिड़काव मिट्टी में नमी की मानक मात्रा बनाए रखता है।

ऐसे बनाएं जीवामृत

गाय का गोबर 10 किलो, गोमूत्र 3 लीटर, गुड़ 2 किलो, बेसन 2 किलो और बरगद के वृक्ष के नीचे की मिट्टी 2 किलो। स्वच्छ पानी 170 से 190 लीटर। इन सभी को मिलाकर घोल बनाएं। जिस ड्रम में यह घोल रखा हुआ है, उसका आधा हिस्सा खुला रखें। अगले 48 घंटे के बाद खमीर उठने पर दो दिन तक मिश्रण को दो बार एक ही दिशा में हिलाएं। झाग और खुशबू, जीवामृत तैयार हो जाने का संकेत है।

स्थिर उत्पादन का भरोसेमंद विकल्प

“जीवामृत केवल जैविक खाद नहीं बल्कि मिट्टी में जीवन लौटाने वाला प्रभावी जैव-उत्तेजक है। इसके नियमित उपयोग से मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ती है, कार्बन स्तर सुधरता है और दीर्घकाल में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। छत्तीसगढ़ जैसी मिश्रित कृषि–वानिकी परिस्थितियों में जीवामृत टिकाऊ खेती, कम लागत और स्थिर उत्पादन का भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।”

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर