भाटापारा। 10 दिवस बंद रहने के बाद पहली जनवरी से परिचालन में लौट आई पोहा मिलें लेकिन संख्या 50 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाई। कितने दिन चल पाएंगी ईकाइयां? जैसे सवाल के जवाब खोजे जा रहे हैं क्योंकि पोहा क्वालिटी के धान की कमजोर आवक और तेज कीमत जैसी समस्या अभी भी मजबूती के साथ खड़ी हुई है।

धैर्य जवाब देने लगा है। देखें कितने दिन चलतीं हैं पोहा मिलें? यह सवाल वह ईकाइयां उठा रहीं हैं, जो 10 दिवस बंद रहने के बाद फिर से परिचालन में आई हैं। हताशा इसलिए बनी हुई है क्योंकि ना तो आवक बढ़ी है ना कीमतों में मंदी आई है। बंद के पूर्व की स्थितियों के साथ रोज प्रभावी होने वाले नियम अब भी आ रहे हैं।मजबूती बरकरार है

मजबूती बरकरार है

नए साल का पहला दिवस पोहा मिलों के लिए तेजी लेकर आया। सामान्य महामाया धान 2200 से 2700 रुपए क्विंटल पर मजबूत रहा, तो पोहा क्वालिटी के महामाया धान में 2800 रुपए क्विंटल पर भाव खुला। अंतिम बोली 2860 रुपए से 2870 रुपए क्विंटल बोली गई। आवक महज 1200 से 1500 कट्टा की रही।

सप्लाई शाॅर्ट

150 से 200 पोहा मिलों में से 50 फ़ीसदी इकाइयों में उत्पादन चालू तो हो गया है लेकिन पोहा क्वालिटी के धान की आवक बेहद कमजोर है। इतनी कमजोर कि संचालन में लौटीं ईकाइयों की रोजाना की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। रही-सही कसर तेज कीमत पूरी कर रही है।

सहारा भंडारित धान का

कमजोर आवक और तेज कीमत जैसी स्थितियों को देखते हुए पोहा मिलें अब अपने आपातकालीन भंडारगृहों में भंडारित धान का सहारा ले रहीं हैं पोहा उत्पादन के लिए लेकिन यह भी कितने दिन तक सहारा दे पाएंगे? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि यह भी खाली हो रहे हैं।

प्रतीक्षा बेहतर की

50 फ़ीसदी पोहा मिलों में पोहा उत्पादन चालू हो गया है लेकिन पोहा क्वालिटी के धान की कीमत अभी भी ज्यादा है। जबकि पोहा की मांग सामान्य है। इसलिए बेहतर दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

  • रंजीत दावानी, अध्यक्ष, पोहा-मुरमुरा उत्पादक कल्याण समिति, भाटापारा