नगरीय निकाय रतनपुर चुनाव


                     बुद्धिसागर सोनी

        नगर का प्रथम परिषदीय कार्यकाल जैसा भी रहा लेकिन एक बात तो तय है कि युवा अध्यक्ष के युवा विकासवादी सोच  नगर को पुराने परपंरागत ढर्रे से निकालकर विकासशील जागृति की नींव तैयार करने में सफल रहा। 
        नगर के प्रथम और द्वितीय आम चुनाव के बीच देश-प्रदेश की राजनीति में व्यापक बदलाव आ गया था था।  देश में कई नये राज्यों का गठन हो चुका था। मप्र के दक्षिण पूर्वी हिस्से को अलग कर सन 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हो गया।  राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस का जनाधार लचर नेतृत्व और गुटबाजी के कारण कमजोर पड़ रहा था वहीं  भाजपा मजबूत पार्टी बनकर उभर रहा था।  बाबरी मस्जिद कांड के नायक लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेई, मुरली मनोहर जोशी सहित सहयोगी मोर्चा जैसे विहिप, बजरंगदल के नायकों और आरएसएस समर्थकों की एकजुटता रंग ला रहा था। 
       नये नवेले छग राज्य में  कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में इस बार बदलाव का असर देखने को मिला।  इस बार निकाय की अध्यक्षीय आसंदी अनुसूचित महिला के नाम आरक्षित रहा।  दोनों दलों ने इस बार अशिक्षित या अल्पशिक्षित महिला प्रत्याशियों पर भरोसा जताया।  भाजपा से कौशिल्या मंडलोई तो कांग्रेस ने अध्यक्ष रमेश सूर्या की मां जयंती देवी को टिकट दिया।  जयंती देवी अपने पुत्र के कार्यकाल का लाभ उठाने में असफल रही लिहाजा जीत का सेहरा कौशिल्या मंडलोई के नाम रहा।  रमेश सूर्य के नकारात्मक व्यवहार का खमियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ा। 
      15 वार्डों में से 12 वार्डों में  मिली जीत के बावजूद कौशिल्या मंडलोई का परिषद पूरे पांच वर्ष आपसी खींचतान और अस्थिरता से घिरा रहा।  उपाध्यक्ष पद को लेकर पार्षदों का समूह दो खेमों में बंटे गया  जो पूरे पांच साल एक दूसरे की टांग खिंचाई करते रहे।  इस बीच जन कल्याणकारी अनेकों योजनाएं प्रेसीडेंट इन कौंसिल की बैठकों में धूल चाटती रही।  परिषद के बिखराव का खामियाजा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सीएमओ सिद्धनाथ मिश्रा को भुगतना पड़ा।  अल्पशिक्षित महिला अध्यक्ष के द्वारा मांगों को मनवाने सीएमओ के प्रशासनिक कक्ष में तालाबंदी कर दिया गया।  अध्यक्ष महोदया के इस अनुसांगिक कदम के विरोध में पार्टी के नौ पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा देकर स्पष्ट बहुमत वाली परिषद को संकट में डाल दिया।  इस पेचोखम को सुलझाने प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के अनुशंसा पर तत्कालीन बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल को बैठक बुलाना पड़ा।  उनके अथक प्रयास और अंततोगत्वा परिषद भंग कर देने की धमकी के बाद दोनों गुटों में तालमेल बैठ पाया। 
       इसी बीच 2006-07  में केन्द्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राजपत्र में प्रकाशन कर पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगरी को धार्मिक पर्यटन नगरी घोषित करते हुए नगर के पर्यटनीय विकास का द्वार खोल दिया, साथ ही नगर के छह किलोमीटर के दायरे में मांस और मदिरा के व्यवसाय पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया।
       लेकिन यह क्या सरकारी तौर पर केन्द्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देते हुए शराब ठेकेदार, राज्य पर्यटन मंडल समिति रतनपुर के सदस्यों के कहने व लिखित अनुशंसा पर परिषद के द्वारा नगर सीमा के भीतर शराब भट्ठी संचालन की अनुमति दे दिया गया। 
        इस पूरे कार्यकाल में पार्षदों के बीच आपसी खींचतान चलता रहा। असंतुष्ट पार्षदों द्वारा अध्यक्ष पर मार्केट शेड के लोहा और शीट चोरी का आरोप लगाया गया।  कुल जमा भाजपा का यह कार्यकाल आपसी खींचतान, गरीबी रेखा राशन कार्डों (मृत/कालातीत) की चोरी, अपराध और बढ़ते जरायम का साक्षी बना रहा। 
क्रमशः जारी …4…           
     लेखक साहित्य सेवक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं आलेख लोक मीमांसा पर आधारित उनके निजी विचार है। इसमें कोई भी संपादकीय हस्तक्षेप नहीं है।