रतनपुर में सौ बिस्तर अस्पताल की घोषणा
हजार साल के वैभवशाली छत्तीसगढ़ राज्य के प्राचीन राजधानी रतनपुर को लिए वर्तमान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुखद सौगात है सौ बिस्तर का सर्वसुविधायुक्त अस्पताल की घोषणा। सिस्टम के किरदार से अगर ये सचमुच फलीभूत हो जाए तो ये अंचल के दलित वंचित लोगों के लिए सुखद वरदान होगा। इसके लिए नगरपालिका अध्यक्ष लव-कुश कश्यप और भाजपा रतनपुर मंडल के अध्यक्ष दुर्गा कश्यप बबलू को कोटि-कोटि साधुवाद। जिनकी सार्थक पहल से जिंदगी देने की उम्मीदों के किरण फूटी है। हालांकि मंडल अध्यक्ष दुर्गा कश्यप बबलू ने तो बारह साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय दाऊ कल्याण सिंह भवन, रायपुर के पत्र क्रमांक एफ 12-16/12/नौ/17 रायपुर, दिनांक 31 MAY 2012 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनपुर की स्थापना के लिए पद सृजन की स्वीकृति की जारी सूचना के अनुसार स्वीकृत रिक्त पदों पर चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों के पदों पर नियुक्ति की मांग का पत्र सौंपा था। आदिवासी अंचल के संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंचल के लोगों के लिए मंडल अध्यक्ष कश्यप के मर्म को समझा और एक कदम आगे की सोंच कर रतनपुर अंचल के लिए सौ बिस्तर वाले अस्पताल की स्थापना के लिए भी पहल कर दी। इसके लिए अंचल के पीड़ित, दलित वंचित जन मानस की ओर से भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हार्दिक आभार और कोटि-कोटि साधुवाद। साधुवाद तो छत्तीसगढ़ कल्चुरी कलार समाज को भी। जिन्होंने अपने प्रदेश स्तरीय सामाजिक आयोजन में मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया। उनके ही मंच से अंचल के लोगों ने जन भावनाओं के अनुरूप सौगात की घोषणा सुनी।

श्रवण सुख को नयन सुख तक पहुंचाने की महती जिम्मेदारी अब हम सब की …
चौंकिए नहीं ऐसा कहना बीते बरसों में हुई कई घोषणाओं के परिणति की कड़वी अनुभूति है। मोटल के लिए मिली तीन करोड़ की राशि सालों साल भटक कर विलीन हो गई। गौरवपथ की सद्गति भी सबको याद होगा। हाईटेक बस स्टैंड की नाकामी भी अभी पुरानी नहीं है। पुरातात्विक महत्व के खंडहरों की सी तरह अधूरे सरकारी निर्माण के खंडहर शहर में पसरे हैं। हाई स्कूल भवन करैहापारा के लिए पीडब्ल्यूडी कोष में जमा 76 लाख रुपए की राशि अपने उपभोक्ता को ढ़ूढ़ रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ही करोड़ों की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर का तीन मंजिली विशाल इमारत और जुटाएं संसाधन मानव संसाधन को तरस रहे हैं। पद स्वीकृति के तेरह साल बाद भी चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों की बाट जोह रहा है। इन सब की तरह मुख्यमंत्री की घोषणा महज श्रवण सुख ही साबित न हो। इस मिथक को तोड़ना होगा। इसके लिए सबको जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर पहल करनी होगी। सबको तुतारी पकड़नी और लगानी होगी। हम सब के जान-माल का मामला है। घोषणा को श्रवण सुख ही नहीं मिलजुलकर नयन-मन सुख बनाना ही होगा।
