जागरूकता अभियान के मिल रहे संकेत
बलौदा बाजार। विदा लेते रबी और आने को तैयार खरीफ। बीच के दिनों में किए जाने वाले बेहद महत्वपूर्ण काम, मिट्टी परीक्षण को लेकर जैसी अरुचि किसानों में दिखाई दे रही है, उससे कृषि अधिकारी चिंता में हैं। संकेत, जागरूकता अभियान चलाए जाने के मिल रहे हैं ताकि किसानों को तैयार किया जा सके।
रबी फसल के अंतिम दिन पहुंचने वाले हैं, और शुरू होने वाला है खरीफ सत्र। आने वाले माह से खाद के गड्ढों से, खाद का ले जाया जाना शुरू हो जाएगा। मॉनसून के आने के पहले मिट्टी का परीक्षण भी जरूरी कार्य है, लेकिन जिले के किसान जैसी अरुचि दिखा रहे हैं, उससे चिंता बढ़ती नजर आ रही है। खासकर कृषि विभाग में चर्चा के दौरान अब यह अरुचि चिंता में डाल रही है। लिहाजा संकेत किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाए जाने के मिल रहे हैं।
इसलिए मिट्टी परीक्षण
सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग से खेतिहर भूमि के लिए, जरूरी पोषक और सूक्ष्म तत्व घटते या बढ़ते हैं। यह फसलों की अल्प वृद्धि या कम होते उत्पादन के रूप में सामने आता है। इस विपरीत परिस्थिति से बचने के लिए मिट्टी परीक्षण करवाया जाना जरूरी माना गया है ताकि पोषक और सूक्ष्म तत्वों की मात्रा जानी जा सके।
होते हैं 17 पोषक तत्व
मिट्टी वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में 17 प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। इनमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्व वायु मंडल से मिलते हैं। शेष 14 पोषक तत्व मिट्टी से मिलते है। इनकी मदद से ही फसलों को बेहतर बढ़वार मिलती है और किसानों को मिलता है बेहतर उत्पादन। लिहाजा मिट्टी के पोषक तत्व किस स्थिति में है ? यह जानकारी मिट्टी परीक्षण के बाद ही मिलती है। इसलिए इसे जरूरी माना गया है।
यह बेहद जरूरी
परीक्षण के दौरान मिलने वाली जानकारियों में, मिट्टी का पीएच मान, सूक्ष्म और मुख्य पोषक तत्व की जानकारी तो मिलती ही है, साथ ही मिट्टी के अम्लीय और क्षारीय होने का भी पता चलता है। यह जानकारी बेहद अहम इसलिए है क्योंकि यही तत्व फसलों की बढ़वार और उत्पादन को तय करने में सक्षम माने गए हैं। मालूम हो कि जिले के हर विकासखंड में मिट्टी की प्रकृति अलग-अलग किस्म की है।


