कृषि छात्रों के व्यक्तित्व क्षमता निर्माण व कैरियर विकास पर व्याख्यान

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में भारत में कृषि उच्च शिक्षा के विकास व सुदृढ़ीकरण के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में कृषि छात्रों के व्यक्तित्व क्षमता निर्माण तथा कैरियर विकास हेतु विभिन्न विषयों पर व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के पहले दिन “योग एवं उसके महत्व” व “राष्ट्रीयकृत बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर बनने हेतु तैयारी कैसे करें?” विषय पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिया ।

डॉ. आर.के.एस. तिवारी, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय ने कहा विषय विशेषज्ञों द्वारा कृषि छात्रों के लिए कैरियर एवं व्यवसाय की संभावनाएं, राज्य एवं सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी, विद्यार्थियों की शारीरिक तंदुरुस्ती एवं मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद प्रबंधन, कैरियर काउंसलिंग जैसे छात्र उपयोगी महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जाएगी, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास एवं कैरियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी । व्याख्यान श्रृंखला के प्रथम सत्र में “योग एवं उसके लाभ” विषय पर शुद्ध योग केंद्र, बिलासपुर की निदेशक मोनिका पाठक ने बताया योग सही तरीके से जीने का विज्ञान है इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए । योग का अर्थ एकता या बांधना है। योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने एवं तालमेल बनाने का एक साधन है। योग सेहतमंद जीवन के लिए बहुत जरूरी है। योग मांसपेशियों को पुष्ट कर शरीर को तंदुरुस्त करता है। योग तन के साथ ही साथ मन और मस्तिष्क को भी तंदुरुस्त करता है।

द्वितीय सत्र में प्रसन्न कुमार सिंह ने “भारत के राष्ट्रीयकृत बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर बनने हेतु तैयारी कैसे करें?” विषय पर जानकारी देते बताया कि प्रोबेशनरी ऑफिसर का पद एक प्रबंधकीय पद है। जिसके लिए आई. बी. पी. एस. पी. ओ. परीक्षा में सम्मिलित होना आवश्यक है। परीक्षा तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार के रूप में होती है । जिसमें अंग्रेजी, न्यूमेरिकल एबिलिटी एवं रीजनिंग एबिलिटी विषय मुख्य है। प्रारंभिक परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड होती है। जिसमें बहु वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान है। मुख्य परीक्षा का कठिनाई स्तर प्रारंभिक परीक्षा से अधिक होता है । तीसरा चरण साक्षात्कार का होता है ।

व्याख्यान श्रृंखला में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से प्रश्न कर अपनी जिज्ञासाओं को दूर कर सफलता के मूल मंत्र जाने। वेबीनार श्रृंखला का समन्वय वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. आर. के. शुक्ला की अध्यक्षता में वैज्ञानिक गीत शर्मा, अजीत विलियम्स, दिनेश पांडे, अजय टेगर एवं सहायक प्राध्यापिका अर्चना केरकट्टा व युष्मा साव ने किया । कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स व आभार अजय टेगर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं छात्र -छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।