बी पी एम और पेट्रोल पंप संचालक भूमिका पर उठ रहे सवाल

भाटापारा। गाड़ी नहीं, फिर भी कैसे निकाले गए पैसे? यह सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि किराया भुगतान को लेकर ना तो दस्तावेज हैं, ना जवाब दिया गया है। इससे जाहिर तो यही हो रहा है कि फर्जी बिल के आधार पर डीजल की रकम आहरित कर ली गई।

पल्स पोलियो जैसे संवेदनशील आयोजन में लगी वाहनों में डीजल-पेट्रोल के लिए दी गई राशि में से एक बड़ी रकम की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आ रहा है। जिसे लेकर पूर्व पार्षद दिलेश कुमार साहू ने सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के माध्यम से खुलासा करते हुए कहा है कि इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बी पी एम राजेश डहरिया की भूमिका की जांच होनी चाहिए। श्री साहू ने आवेदन के साथ सूचना का अधिकार के तहत, मिली जानकारी जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भेजी है।


गाड़ी नहीं, फिर भी डीजल खर्च

जनवरी 2021 में पल्स पोलियो अभियान के तहत जितनी भी गाड़ियां उपयोग में लाई गई, उन सभी को किराया और पेट्रोल- डीजल का भुगतान किया गया लेकिन फरवरी में लगी ऐसे छह वाहन को डीजल का भुगतान किया गया, जिनका अस्तित्व नहीं था। यह खुलासा, सूचना का अधिकार के तहत हासिल दस्तावेजों से हुआ है, जिसमें किराया का अता-पता नहीं हैं लेकिन डीजल भुगतान का बिल नत्थी किया गया है।


कैसा है वाहन का प्रकार

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए आवेदन में आग्रह किया गया है कि मामला संदेहास्पद देखते हुए जिन वाहनों को डीजल भुगतान किया गया है, उनके हैवी या सामान्य वाहन होने की जानकारी साथ में आनी चाहिए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि गाड़ियां आयोजन में उपयोग की गईं या नहीं ?


पेट्रोल पंप की भी भूमिका संदेहास्पद

पूर्व पार्षद दिलेश साहू ने पेट्रोल पंप संचालक की भूमिका पर भी संदेह जताते हुए कहा है कि 48620 रुपए में से 15200 रुपए का फर्जी बिल कैसे और किसके कहने पर जारी किया गया? इसका खुलासा होना आवश्यक है। इसके अलावा भुगतान का काम देख रहे बी पी एम राजेश डहरिया की भी भूमिका की जांच जरूरी है।