नवरात्रि पर्व पर भी प्रभावी होंगे कोविड-19 के नियम

भाटापारा । यह विघ्नहर्ता की ही कृपा है, जिससे 17 देवी प्रतिमाएं आकार ले रहीं हैं। गणेश पर्व के सुखद समापन के बाद नवरात्रि की तैयारियों में जुटा मूर्तिकार तिलक वर्मा सामान्य होते जीवन और पर्व के सुखद दिनों की वापसी की कामना कर रहा है। कोविड नियमों के पालन को लेकर सतर्क, उसने ज्यादा संख्या में निर्माण की बजाय प्राथमिकता, इस बात को दी है कि परंपरा का निर्वहन पूरी गंभीरता के साथ हो।

भाटापारा-निपनिया मार्ग में स्थित ग्राम सूरजपुरा में गणेश पर्व के बाद, अब नवरात्रि के लिए दुर्गा प्रतिमा को आकार देने का काम किया जाने लगा है। आस्था और विश्वास से जुड़े हर पर्व में अपनी कला के लिए पहचान बना चुके तिलकराम वर्मा ने दुर्गा पूजा की तैयारी चालू कर दी है। गणेश पर्व की ही तरह उसने आगत नवरात्रि के लिए सीमित संख्या में दुर्गा प्रतिमा के निर्माण का लक्ष्य रखा है। संक्रमण की स्थिति भले ही कम होती जा रही हो लेकिन कोविड नियम प्रभावी हैं इसलिए इस बार मात्र 17 दुर्गा प्रतिमाएं आकार ले रहीं हैं।


इसलिए महंगे में

गणेश पर्व की भांति, नवरात्रि भी इस बार महंगाई के साए में मनाई जाएगी। प्रतिमा निर्माण के लिए जरूरी गुणवत्ता वाला पैरा ,लकड़ी पहली सामग्री है। इसकी खरीदी बीते साल की तुलना में दोगुनी कीमत पर की गई है। उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी के लिए भी ज्यादा पैसे देने पड़े। रही- सही कसर कलर और परिधान ने पूरी कर दी है। आभूषण, यहां नहीं मिलते। इसकी खरीदी रायपुर या बिलासपुर से की जाएगी। लॉकडाउन के बाद खुली इकाइयां वैसे भी लंबे समय के बाद परिचालन में आई हैं। ऐसे में नुकसान की भरपाई कीमतों में वृद्धि से ही की जा रही है।


मिलेंगी इस कीमत पर

तेजी के मजबूत कारणों की जानकारी देते हुए तिलक बताता है कि इस नवरात्रि पर देवी प्रतिमाओं की दर 5000 रुपए पर शुरू होगी और अंतिम दर 8000 रुपए होगी। लागत ,व्यय और बाजार की कमजोर स्थितियों को देखते उसने मात्र 17 प्रतिमा निर्माण का लक्ष्य रखा है।


इस ऊंचाई पर

कोविड नियमों के मुताबिक दुर्गा प्रतिमाओं की ऊंचाई 4 से 5 फीट की ही होगी। प्रयास इस बात का है कि नियमों का पालन पूरी गंभीरता से हो। लिहाजा इससे ऊंची प्रतिमा नहीं बनाई जा रही है। संख्या इसलिए नहीं बढ़ाई क्योंकि दुर्गा पंडालों को अनुमति के लिए कड़े नियम बने हुए हैं।