राइस डक तकनीक से बढ़ेगा धान का उत्पादन

बलौदा बाजार। खरपतवार नष्ट करने के लिए जरूरी दवाएं और रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता बहुत जल्द खत्म की जा सकेगी। केंद्रीय चावल अनुसंधान केंद्र, कटक की योजना किसानों तक राईस डक टेक्नोलॉजी के नाम से पहुंचने जा रही है। इस अनोखी योजना से धान की खेती की  लागत में काफी हद तक कमी की जा सकेगी। इससे लगभग 50 फ़ीसदी अतिरिक्त लाभ भी होगा।

खरपतवार। कीट प्रकोप। दवाएं। यह कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिन्हें किसान हर सीजन में न सिर्फ देखता है बल्कि कष्ट भी उठाता है। यह इसलिए क्योंकि ये कारक फसल को हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं। केंद्रीय चावल अनुसंधान केंद्र, कटक ने जो नया अनुसंधान किया है, उसकी स्वीकार्यता के बाद किसानों को, बरसों से चली आ रही इन समस्याओं से निजात तो मिलेगी , साथ ही रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी क्योंकि “राईस डक टेक्नोलॉजीय से इस पर भी  सफलता मिली है।

यह है राइस डक टेक्नोलॉजी

केंद्रीय चावल अनुसंधान केंद्र, कटक द्वारा तैयार इस योजना के तहत 200 बत्तख के समूह को धान की फसल की कटाई के एक माह पहले तक फसल क्षेत्र में ही रहने देना होगा। इस दौरान, बत्तख का समूह शत्रु कीट और खरपतवार को अपना आहार बनाएगा। सेवन के बाद यह समूह खेत में ही बीट देगा। भरपूर नाइट्रोजन वाले इस बीट से, तैयार हो रही इस फसल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।


कम होंगे खरपतवार और शत्रु कीट

पानी में रेंगते हुए बत्तख का यह समूह, जो हलचल पैदा करेगा, उससे प्रकाश संश्लेषण कम होगा। यह प्रक्रिया खरपतवार को कम करने में मदद करेगा। पानी में विचरण करता हुआ यह बत्तख समूह घोंघा और शत्रु कीट को अपना आहार बनाएगा और देगा ऐसी बीट, जिसमें भरपूर मात्रा में नाइट्रोजन के होने की जानकारी प्रमाणित हुई है। जाहिर है, इसका असर फसल उत्पादन पर प्रभावी होगा।


रासायनिक उर्वरक भी कम

लगातार 5 से 6 घंटे तक खेतों में ही फसलों के बीच वितरण करने वाला यह बत्तख समूह जो बीट देंगे, उन में कई ऐसे तत्व होंगे, जिसकी वजह से नाइट्रोजन के अलावा फास्फोरस और पोटाश की जरूरतें प्राकृतिक तौर पर पूरी की जा सकेंगी। लिहाजा किसान, रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता काफी हद तक दूर करने में सफल होंगे। इसे बड़ी सफलता, इसलिए माना जा रहा है क्योंकि प्राकृतिक बढ़वार मिलने से धान के पौधों को स्वाभाविक बढ़त मिलेगी। इसका असर बढ़े हुए उत्पादन के रूप में सामने आएगा।


चावल बत्तख एकीकरण योजना अपने आप में बेहद अनोखी और लाभदायक योजना है। इसकी मदद से खरपतवार का प्रबंधन प्राकृतिक तरीके से किया जा सकता है। साथ ही शत्रु कीट से निपटने में भी सफलता मिलती है।

  • डॉ. सी. के. पांडे, रिटायर्ड उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, बलौदा बाजार