नगर पालिका परिषद आम चुनाव 2025
   

मतदान खत्म हुआ, चौक-चौराहों, गली-कूचों और गुमटियों में परिणाम आने के पहले कयासों का दौर चल रहा है।  स्थानीय एक्जिट पोल अपने अपने आंकलन के मुताबिक जीत हार का अनुमान बता रहे हैं।  इस बार नगरपालिका का चुनाव विगत पांच पंचवर्षीय चुनावों से कई मायनों में सबसे अलग था।  प्रत्याशी चयन के लिए दोनों प्रमुख पार्टियों के आलाकमान ने जो भी मापदंड रखे हों लेकिन बी-फार्म जारी होने के बाद  पार्टी के अन्य दावेदार नाखुश और असंतुष्ट दिखे।  चर्चाओं की मानें तो आलाकमान ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में बूथवार परिणामों के आधार पर प्रत्याशी का चयन किया था। कदाचित दोनों पार्टी के आलाकमान इस बात को नजरअंदाज कर गये कि यह स्थानीय चुनाव है, जिसमें चयनित प्रत्याशी के स्थानीय जनाधार को प्रमुख घटक माना जाता है।  परिणाम यह हुआ कि चयनित प्रत्याशी से कहीं अधिक जनाधार रखने वाले दावेदारों ने अपने समर्थकों सहित बग़ावत का बिगुल बजा दिया। मजेदार बात यह कि दावेदारों के समर्थक भी दो गुटों में बंट गये। एक गुट बे-मन से पार्टी में प्रत्याशी के साथ लगा रहा तो दूसरा गुट बागी के साथ खड़ा रहा।  पूरे चुनावी अभियान के दौरान मतदातागण दसों सेनापतियों सहित पार्षदीय सिपहसालारों के आपसी खींचतान, आरोप प्रत्यारोप का लुत्फ उठाते दिखे।

   जीत के अनुमान की बात करें तो इस बार अध्यक्षीय आसंदी का चुनावी चक्र जातिगत समीकरण के इर्द गिर्द घूमता नजर आ रहा है। प्रत्याशियों ने अपना दांव स्वजातीय मतदाता को रिझाने में लगा रखा है। नगर के कुल मतदाताओं में चालीस फीसदी वोट अनुसूचित जाति, दस से पन्द्रह प्रतिशत कुर्मी समाज तथा यादव समाज, पांच से सात फीसदी अल्पसंख्यक एवं बीस से पच्चीस फीसदी अन्य जाति के मतदाता हैं।  इस बार अनुसूचित जाति वर्ग से मात्र एक प्रत्याशी अध्यक्ष पद की लड़ाई में है।  एक प्रत्याशी यादव समाज से तथा दो प्रत्याशी कुर्मी समाज से है।  जबकि ठाकुर समाज से तीन एवं कलार समाज से एक प्रत्याशी मैदान में हैं।  यदि मतदाताओं ने मतदान में सगा-सगा का फंडा अपनाया तो चालीस प्रतिशत वोट बैंक वाले प्रत्याशी का जीतना तय लग रहा है।  किंतु यहां पर एक फांस नजर आ रहा है।  नामांकन भरने वाले दो अन्य प्रत्याशी जिनमें एक का फ़ार्म निरस्त हो गया था तथा दूसरे ने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में नाम वापस ले लिया था।  इन दोनों दावेदारों को कांग्रेस समर्थक माना जाता है।  यदि इनके जनाधार का वोट पंजा में गया होगा तो स्लेट और बांसुरी के लिए मुश्किलें हो सकती है।  कमल और हारमोनियम दोनों कुर्मी समाज के है। ऊपर से तुर्रा यह कि दोनों एक ही वार्ड के निवासी हैं।  आटोरिक्शा का चालक भी इसी वार्ड का है तथा व्यावहारिक और मिलनसार होने के कारण मजबूत जनाधार रखता है।  इन तीनों के जनाधार के मत विभाजन का फायदा पंजा और बांसुरी के पक्ष को मजबूत कर सकता है। 
     जातिगत समीकरण के अलावा मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग जो शिक्षित और नौकरीपेशा है ऐसे वोटर्स इस बार कुछ भी बोलने से गुरेज कर रहा है।  जबकि यही वोट परिणाम में निर्णायक भूमिका निभायेंगे।  ग्रामीण बेल्ट में धनबल, जनबल, दारु और सामग्री वितरण का ट्रेंड भी कारसाज साबित होता है।  हांलांकि इन वोटर्स को परंपरागत वोटर कहा जाता है जो पार्टी सिम्बाल को तरजीह देता है।
      बहरहाल परिणाम आने में अधिक विलंब नहींं है।  कल दोपहर तक विजेता का निर्णय निकल आयेगा।  तब तक के लिए सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं।  जनता जनार्दन को एक नये पंचवर्षीय परिषदीय कार्यकाल को झेलने के साधुवाद
        बुद्धिसागर सोनी, साहित्य सेवक एवं सामाजिक कार्यकर्ता