रोजगार मूलक कौशल और उद्यमशील मानसिकता पर कार्यशाला संपन्न

बिलासपुर।  रोजगार मूलक कौशल और उद्यमशील मानसिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। रोजगार मूलक कौशल किसी नौकरी या व्यवसाय में सफल होने के लिए जरूरी तकनीकी और सॉफ्ट स्किल्स प्रदान करते हैं, वहीं उद्यमशील मानसिकता व्यक्ति को नवाचार करने और जोखिम उठाने की प्रेरणा देती है। इन दोनों का समावेश व्यक्ति को कुशल कर्मचारी, सफल उद्यमी बनने में मदद करता है। यह बात मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ.एन.के.चौरे कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने कही ।

बी.एस.सी. कृषि चतुर्थ वर्ष के छात्र- छात्राओं के लिए एक दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अधिष्ठाता डॉ.चौरे कहा रोजगार मूलक कौशल और उद्यमशील मानसिकता व्यक्ति को बेहतर पेशेवर बनने में मदद करते हैं। उसे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत और योगदानकर्ता बनाते हैं। व्यक्ति इन दोनों का संतुलन स्थापित कर अपनी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग कर सकता है। सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

मुख्य वक्ता साहिल गांधी मैनेजिंग डायरेक्टर एसएस अकाडमी फॉर सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट ने बताया उद्यमशीलता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, नवाचारों और संसाधनों का उपयोग करके व्यवसाय या उद्यम शुरू करता है। इसका उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत लाभ कमाना होता है, बल्कि समाज में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और आर्थिक विकास में योगदान देना भी होता है। उद्यमशीलता व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और देश की प्रगति में सहायक होती है। इसे अपनाकर न केवल आप आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर सकते हैं। रोजगार मूलक कौशल वे कौशल और क्षमताएँ हैं जो व्यक्तियों को नौकरी प्राप्त करने, बनाए रखने और कार्यस्थल में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करती हैं। ये कौशल किसी भी क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा जा सकता है: सॉफ्ट स्किल्स और हार्ड स्किल्स।

सॉफ्ट स्किल्स ये वे व्यक्तिगत गुण और सामाजिक कौशल हैं जो किसी भी पेशेवर वातावरण में प्रभावी संचार और सहयोग सुनिश्चित करते हैं। जिसमें प्रभावी ढंग से बोलने, लिखने और सुनने की क्षमता। समस्याओं को पहचानना और उनके समाधान के लिए रणनीतियाँ बनाना। टीम के साथ मिलकर काम करने की क्षमता। अपने समय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना। दूसरों को प्रेरित करने और टीम को दिशा देने की क्षमता। नए परिवेश और परिस्थितियों में समायोजन करना। कार्य और निर्णय में भरोसा रखना मुख्य है।

हार्ड स्किल्स ये तकनीकी और व्यावसायिक कौशल हैं जो किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए आवश्यक होते हैं। जैसे एमएस ऑफिस, डाटा एंट्री, कोडिंग, और इंटरनेट का उपयोग। हिंदी, अंग्रेज़ी या अन्य भाषाओं का ज्ञान। मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, ड्राफ्टिंग, या मशीन ऑपरेशन। अकाउंटिंग, डिजाइनिंग, मार्केटिंग, या सेल्स। SEO, सोशल मीडिया मार्केटिंग, और कंटेंट क्रिएशन। फोटोशॉप, कोरल ड्रा, और अन्य डिज़ाइनिंग सॉफ़्टवेयर कौशलों के माध्यम से व्यक्ति रोजगार क्षमता बढ़ा सकता है। अधिक आकर्षक करियर विकल्प पा सकता है। इस मौके पर प्राध्यापक, वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कृषि वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने आभार व्यक्त किया।