जान ले क्या है बेहतर विकल्प 

रतनपुर। महामाया चौक से महामाया देवी मंदिर तक सड़क चौड़ी करने रची बसी घनी आबादी में बने मकान और दुकानों को तोड़ने से बेहतर है दस किसानों की कृषि भूमि को अधिग्रहित कर लिया जाए। इस पर मन भावन चौड़ी सड़क बनाई जा सकती है। इसके साथ ही सड़क के डिवाइडर के रूप में बारहमासी पानी से भरे प्राकृतिक नाला और सवा एकड़ सरकारी जमीन भी बोनस में मिल जाएगी। इस सड़क के बनने से जहां नए लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मंदिर तक हर तरह के वाहनों की पहुंच सुलभ होगी। वहीं वीआईपी के आवाजाही से आम लोगों को होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।
      अंचल के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने रतनपुर को संवारने कारीडोर बनाने सपने बुने है। इन सपने को पूरा करने करोड़ों रुपए खर्च करने के चर्चे हैं। इसके लिए कवायद शुरू हो चुकी है। सर्वे का का पूरा हो जाने की भी बात कही जा रही है। हालांकि कि इसकी अधिकारिक पुष्टि स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं कर रहे हैं। इसकी जानकारी अधिकारियों के द्वारा अधिकारिक रूप से दी भी नहीं गई है। अब तक की सारी खबरें बतरस के ही चर्चे हैं। शहर में चल रही इन चर्चों ने सड़क किनारे रचे बसे लोगों की नींदें उड़ा दी है। क्यों कि चर्चें उनकी रोजी रोटी, जीवन से जुड़े हैं। बात निकली है महामाया चौक से महामाया देवी के मंदिर तक दोनों ओर की सड़क को चौड़ा करने का।‌ सकरी सड़क की वजह से आए दिन इस रोड पर यातायात बाधित होते रहता है। इस दिक्कत से लोगों को राहत दिलाने सड़क के दोनों ओर तीस तीस फीट सड़क को चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। अगर ऐसा है तो बरसों से रचे बसे दो सौ से भी अधिक दुकान और मकानों को तोड़कर हटाना पड़ेगा। इनके घर दुकान नहीं रहेंगे तो इसका प्रभाव इन लोगों के रोजी रोजगार पर पड़ेगा।  कई परिवार ऐसे हैं जिनकी आजीविका इस सड़क पर लोगों के आवाजाही से ही चलती है। इनको मुआवजा तो मिल जाएंगे पर रोजी रोजगार का संकट इनके सामने खड़ा हो जाएगा। हो सकता है ऐसे में शासन को प्रभावित लोगों के तीखे आक्रोश का सामना करना पड़े।

बेहतर विकल्प है, ध्यान दें सरकार ….

सरकार की मंशा अगर सचमुच में ही लोगों को कारीडोर के रूप में बेहतर और सुविधा जनक मन भावन चौड़ी सड़क महामाया देवी मंदिर तक बनाने की है तो अच्छा विकल्प है। इसमें सिर्फ दस किसानों के दस खसरे की कृषि जमीन को ही अधिग्रहित करना पड़ेगा। इसमें बाईं ओर छह किसानों और दायीं ओर चला किसानों की जमीन है। दोनों सड़क के बीच में सरकारी प्राकृतिक बारहमासी पानी से भरे नाला बोनस में मिल जाएगा। जिसे सजा संवार कर सैलानियों को आकर्षित करने आकर्षक बनाया जा सकता है। इसके साथ ही इस सड़क के बनने से खसरा नंबर 3310 रकबा 0.4820 हेक्टेयर शासकीय भूमि भी उपयोगी हो जाएगी। जिसका उपयोग मोटल निर्माण के लिए भी किया जा सकता है।

इन किसानों के जमीन के हिस्से करने पड़ेंगे अधिग्रहित

रतनपुर बिलासपुर रोड पर बड़े पूल के बाएं ओर

3246/1 महामाया मंदिर ट्रस्ट रतनपुर
3245/2  संतोष शर्मा पिता रामखिलावन
3241   शासकीय जमीन
3242 इसके चार बटांकन हुए हैं
3242/1 = सुफल पटेल
3242/2 चंद्र कांता पति ज्वाला
3242/3 सुफल पिता छेदू
3242/4  चंद्र कांता पति ज्वाला प्रसाद
3240 = (3240/1,)  राकेश, जय, सत्या पिता अनिल श्रीवास, (3240/2)  सुफल पिता छेदूलाल पटेल
3238  राजाराम, श्याम कार्तिक, शरद पिता मुन्ना लाल
3236/1 राधेश्याम पटेल
                   दाएं ओर
3310       शासकीय भूमि
3311/1    रामगोपाल पिता दुकोड़ प्रसाद
3312       ज्ञानेंद्र अग्रवाल पिता जोगीराम
3315/1    शारदा देवी पति जगदीश
3314        दौपति पति राजेन्द्र गिरी

मंत्री तोखन को लिखा पत्र

रतनपुर को विकसित करने बनाई जा रही योजनाओं के लिए केंद्रीय शहरी आवास राज्य मंत्री तोखन साहू का आभार व्यक्त करते रतनपुर आईटी सेल के प्रभारी भाजपा कार्यकर्ता सुधाकर तंबोली ने पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने शहर में महामाया मंदिर तक सुलभ आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग सुझाएं है। इसमें उन्होंने महामाया चौक से महामाया देवी मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण करने की चल रही चर्चाओं पर चिंता व्यक्त कर लोगों के सामने रोजी-रोटी रोजगार का संकट खड़ा होने की बात कही है। पत्र में वैकल्पिक सुझाएं गए मार्ग पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।