ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों की मनमानी

भाटापारा।  सख्त नजर। किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन के यह शब्द, बेमतलब का मानता है उर्वरक बाजार। तभी तो उसने एक बार फिर से ग्रोमोर और यूरिया जैसी अहम उर्वरक अपनी कीमत पर बेचना शुरू कर दिया है।

छिटपुट हो रही बारिश और सिंचाई साधन वाले किसानों ने पौधों की बढ़वार को देखते हुए रोपाई और बियासी का काम चालू कर दिया है लेकिन खुले बाजार से उर्वरक की खरीदी बेहद महंगी पड़ने लगी है क्योंकि ग्रोमोर और यूरिया की जो कीमत ली जा रही है वह असाधारण रूप से बहुत ज्यादा है लेकिन विवशता में किसान दोनों उर्वरक की खरीदी बढ़ी हुई कीमत पर कर रहें हैं ।

पहली जरूरत 30 से 50 रुपए ज्यादा

रोपाई और बियासी। दोनों में ग्रोमोर जैसे उर्वरक की सबसे पहली जरूरत होती है। खुले बाजार पहुंच रहे किसानों के होश उड़ा रही है इसकी कीमत। 1700 रुपए प्रति बोरी वाला ग्रोमोर, शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र की दुकानें 1730 रुपए और दूरी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में 1750 रुपए प्रति बोरी जैसी मनमानी कीमत पर बेच रहीं हैं। विवशता में किसान ग्रोमोर की खरीदी कर रहे हैं।

इसमें सबसे ज्यादा

यूरिया। हर फसल के लिए अहम है। संभावित कमी जैसी आशंका के बीच किसान इसकी खरीदी खुले बाजार से करने लगे हैं लेकिन 266 रुपए 50 पैसे वाली यूरिया की प्रति बोरी 350 रुपए में खरीदने के लिए विवश है किसान। यानी प्रति बोरी लगभग 83 रुपए अधिक ले रहा है उर्वरक बाजार। जरूरत है इसलिए किसान यह कीमत भी मंजूर कर रहे हैं।

यह कहना है उर्वरक बाजार का

एमआरपी से अधिक मूल्य पर उर्वरक बाजार का कहना है कि खुले बाजार के लिए जारी उर्वरक की मात्रा जरूरत के हिसाब से महज 25 फ़ीसदी ही है। इसके अलावा कंपनियां ‘लादन’ के रूप में अतिरिक्त सामग्री की अनिवार्यता रखती है। इसकी कीमत उर्वरक के ऑर्डर के दौरान ही ले ली जाती है। दिक्कत तब आती है, जब किसान लादन की खरीदी से इंकार करता है। इसकी भरपाई अधिक मूल्य में विक्रय करके की जा रही है।

करेंगे सघन जांच

ग्रोमोर और यूरिया की जो कीमत खुले बाजार में ली जा रही है, वह नियम विरुद्ध है। मैं खुद जांच के लिए निकल रहा हूं।
– दीपक कुमार नायक, उपसंचालक, कृषि, बलौदा बाजार