मौसम सांवा के साथ…
बन और चौड़ी पत्तियाँ मुख्य फसल पर भारी
बिलासपुर। मौसम अब खरपतवार का साथ दे रहा है। चुनौती बन रही है सांवा, दूबी, बदौरी, चौड़ी पत्तियाँ और आलू बन जैसी मजबूत खरपतवार की प्रजातियां। बोनी वाले खेतों में जिस तेजी से बढ़वार ले रहे हैं, उसी अनुपात में निपटान पर व्यय भार भी किसानों पर बढ़ रहा है।
उर्वरक की खरीदी पर लग रही पूंजी के बाद अब खरपतवार नाशक की खरीदी किसानों के पसीने छुड़ा रही है। प्रबंधन पर लग रही यह रकम और भी बढ़ने की आशंका बन रही है क्योंकि मौसम का पूरा साथ किसानों को नहीं बल्कि खरपतवार को मिल रहा है। ऐसे में खरीफ सत्र बेहद महंगी पड़ रही है।
दोनों में समान
खुर्रा बोनी और रोपाई। दोनों स्थितियों में तैयार हो रहे पौधों पर खरपतवार भारी पड़ने लगे हैं। खास तौर पर सांवा और चौड़ी पत्ती जैसे खरपतवार की शिकायतें खूब आने लगीं हैं। इसके साथ खुर्रा बोनी वाले खेतों में आलू बन और दूबी तेजी से फैलाव ले रही है। मुख्य फसल को प्रभावित करने वाली यह प्रजातियां किसानों पर इसलिए भारी पड़ रही है क्योंकि खरपतवार नाशक दवाइयों की कीमत क्रय शक्ति से लगभग बाहर हो चली है।
प्रबंधन पर बढ़ रहा व्यय
न्यूनतम 400 रुपए प्रति एकड़। अधिकतम की सीमा नहीं क्योंकि जितनी ज्यादा मात्रा में खरपतवार होंगे, प्रबंधन पर उतना ही ज्यादा खर्च किसानों को करना होगा। फिर भी खरपतवार नाशक दवाइयां बेचने वाली संस्थानों का कहना है कि अधिकतम सीमा 600 से 800 रुपए प्रति एकड़ तक जा सकती है। यह रकम अगर आगे बढ़ी, तो निश्चित जानिए कि मुख्य फसल पर पूरी तरह आच्छादित हो चुके हैं खरपतवार।

अनिवार्य यह काम
खरपतवार की यह सभी प्रजातियां मुख्य फसल को न केवल प्रभावित करती हैं बल्कि उत्पादन पर भी गहरा असर डालती हैं। इसलिए समय रहते खरपतवार नाशक का नियंत्रित मात्रा में छिड़काव करना आवश्यक होगा। मेड़ों की सफाई इसलिए जरूरी मानी जा रही है क्योंकि यहां भी खरपतवार ने जड़ें जमा लीं हैं।
फौरन करें छिड़काव
मौसम जिस तरह बना हुआ है, उससे खरपतवार को फैलाव के लिए पूरा समय मिल रहा है। किसानों को प्रबंधन के उपाय फौरन करने होंगे।
– डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
