वेटिंग चेयर पर बैठी मां की गोद में इलाज

एक बेड पर दो-तीन मरीज

रतनपुर। आसपास के गांवों में डायरिया तो पहुंच विहिन वनांचल में मलेरिया पसर गया है। इनसे निपटने दस्तावेज और अखबारों में सरकारी अमला घर-घर पहुंच गई है। इधर पीड़ित मरीज हैं कि जान बचाने अस्पताल आना कम नहीं कर रहे हैं। अखबारों में छपी मौत की खबरों पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस भी चिंतित हैं जो स्वाभाविक भी है। आजादी के इतने बरस बाद भी डायरिया और मलेरिया से मौतें होती रहे तो ये गंभीर चिंता का विषय है ही। जिम्मेदार अफसरों को नोटिस भेजे गए हैं । हाई कोर्ट के नोटिस पर जमीनी सरकार अमला कितना गंभीर है इसकी पूरी व्याख्या वेटिंग चेयर पर बैठी बेबस मां, जिसकी गोद में ही उसके तीन साल के दिल के टुकड़े को लेटा कर स्लाइन चढ़ाने की ये छाया और चल चित्र कर रही है।

ये तस्वीर है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर की जहां भर्ती होने वाले डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। संक्रमण एक गांव से दूसरे गांव बढता जा रहा। प्रशासन की कवायद ऐसी की हालात अब भी अनियंत्रित। इधर अस्पताल में उपचार स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे। ड्यूटी पर कौन डॉक्टर हैं कोई बताने को तैयार नहीं।

रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बिस्तर फूल है। स्थिति ऐसी कि एक बेड में दो-तीन मरीजों को लेटा कर उपचार किया जा रहा हैं। शहर के महामाया पारा से शुरू हुई डायरिया अब आस पास के गांवों में पसर गई है। छह जुलाई से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेड के फूल हो जाने का सिलसिला जो शुरू हुआ है वो अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। हर रोज जितने मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं उससे अधिक नए लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो जा रहे हैं। महामारी की तरह संक्रमण एक गांव से दूसरे जाकर पसर जा रहा है। शहर के साथ अंचल के गांवों में 6 जुलाई से पसरा डायरिया 14 दिन बाद भी नियंत्रण में नहीं है । बीते 14 दिन में 232 डायरिया पीड़ित गंभीर मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनपुर में भर्ती कराया गया। इनमें से हालत में सुधार होने पर 188 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है वहीं 35 से भी ज्यादा गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है । औसतन हर दिन 16 डायरिया पीड़ित गंभीर मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती किया जा रहा है। शुक्रवार को ही 30 से भी अधिक गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। इसके मुकाबले 14 मरीज ही ठीक होकर घर लौटे। वहीं एक मरीज की हालत चिंताजनक होने पर उसे रेफर किया गया।

शुक्रवार की देर शाम तो हालात ऐसी कि एक बेड पर दो तीन मरीजों को लेटा कर स्लाइन लगाया गया था। कुछ मरीजों के लिए तो वेटिंग चेयर ही बेड बन गई थी। जिसमें लेटा कर मरीज को स्लाइन चढ़ाकर उपचार किया जा रहा था।

महामाया पारा रतनपुर निवासी तीन साल का मासूम भी इन्हीं बेबस मरीजों में शामिल था जो वेटिंग चेयर पर बैठी मां की गोद में लेट कर अस्पताल में उपचार कराने बेबस था। उस मासूम को मां की गोद में ही लेटा कर स्लाइन लगाया गया था।

डायरिया फैलने की खबर डिप्टी सीएम अरुण साव भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर पहुंचे थे। डायरिया होने की जरा भी संशय होने पर सरकारी अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दे गए थे। प्रशासन भी अस्पताल में बेहतर सुविधाएं होने के दावें कर रहा। तब फिर फिरकी कौन ले रहा, रांग नंबर कहां से लग रहा, छाया चित्र चल चित्र में एक बेड पर दो तीन मरीज, वेटिंग चेयर पर लेटकर बैठ कर उपचार कराते क्यों दिख रहे हैं।

कौन-कौन डॉक्टर ड्यूटी पर है इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल पा रही है। डॉक्टर अपनी कुर्सी पर दिख रहे हैं न वार्ड में भर्ती मरीजों के पास । सब कुछ नर्सिंग स्टाफ और आरएमओ के भरोसे चल रहा। आर एम ओ वहीं जिनको डॉक्टर के सहायक के रूप में ही काम करना है।