सतह का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पर



बिलासपुर।  भूमि का तापमान 05 सेमी की गहराई तक 33 डिग्री सेल्सियस। 10 सेंटीमीटर में 34 डिग्री सेल्सियस लेकिन 20 सेंटीमीटर की गहराई में 38 डिग्री सेल्सियस। यह उस सूर्य का प्रकोप है, जो औसतन 6 से 8 घंटे तक चमक रहा है।

बादलों की आवाजाही भले ही ताजा-ताजा बनी हुई है लेकिन बीते दिवसों में सूर्य चमक की अवधि के बढ़ी हुई होने से भूमि का तापमान बढ़ा हुआ है। असर उस जल भंडार पर पड़ता देखा जा रहा है, जो 9 से 4 मिली लीटर की गति से वाष्प बनकर वायुमंडल में समा रहा है। उससे वाष्प दबाव का स्तर 21.5 मिमी पर जा पहुंचा है।

चमक रहा सूर्य, तप रही धरती

बादलों की  आवाजाही। सूर्य चमक  चार घंटे लेकिन दो दिवस पूर्व यही सूर्य 6 से 8 घंटे तक लगातार चमक रहा था। तेज धूप की वजह से धरती की सतह का तापमान 5 सेंटीमीटर की गहराई तक 33 डिग्री सेल्सियस, 10 सेंटीमीटर की गहराई पर 34 डिग्री सेल्सियस और 20 सेमी की गहराई पर तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा है। बढ़त के इस क्रम पर भले ही विराम लगा हुआ हो लेकिन राहत के आसार फिलहाल कम ही हैं।

वाष्प दबाव और वाष्पन तेज

सूर्य चमक की अवधि जिस स्तर पर बनी हुई है, उसका असर जल भंडार पर भी देखा जाने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय वाष्प दबाव 21.5 मिमी पर स्थिर है लेकिन वाष्पन की गति 9.4 मिली मीटर प्रति घंटा मापी जा रही है। चिंता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि सतह और सतह के नीचे के जल भंडार में मात्रा तेजी से कम हो रही है। यह पानी संकट की वजह बन सकती है।

न्यूनतम और अधिकतम

मेघमय है आकाश लेकिन तापमान अभी भी राहत देने से दूर ही है। न्यूनतम तापमान फिलहाल 28 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर है। नमी 60% पर भले ही मापी जा रही हो लेकिन महज 5.2 किलोमीटर की गति से चल रही हवा से कोई राहत नहीं मिल रही है क्योंकि यह अभी भी गर्म ही है।

राहत अभी नहीं

बादलों की वजह से भले ही हल्की राहत महसूस की जा रही हो लेकिन बीते दिनों सूर्य चमक की अवधि जैसी बढ़ी उससे भूमि का तापमान बढ़ा हुआ है। यह स्थिति जल भंडार पर गहरा असर डाल सकती है।
-एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर

By MIG