कहर मौसम परिवर्तन का
गुणवत्ता खराब होगी गेहूं की…
बिलासपुर। गुणवत्ता प्रभावित होगी। जो पौधे पूरी तरह गिर गए हैं, उन्हें बचा पाना संभव नहीं होगा। मौसम में आया यह बदलाव गेहूं की फसल के लिए बेहद नुकसान पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
गेहूं। बेहतर संभावना पर बेमौसम बारिश, पानी फेर देने वाली मानी जा रही है। तेज हवाएं, जहां तैयार हो रही फसल के लिए खतरनाक साबित हो रहीं हैं, वहीं ओले के साथ बरस रहीं बूंदे दानों पर कहर बरपा रही है। कुल जमा परिणाम, गुणवत्ता खराब होने के रूप में निश्चित ही देखा जाएगा।

प्रभावित होगी गुणवत्ता
तेज हवा। ओले और मानसून के दिनों जैसी बारिश। यह तीनों मिलकर परिपक्वता अवधि में पहुंच रही गेहूं की फसल को बेतरह नुकसान पहुंचाएंगे। जो फसल गिर चुकी है, उसके दाने लगभग पूरी तरह खराब हो जाएंगे, तो आधे झुक गए पौधों के दानों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर देखा जाएगा। यानी नुकसान दोनों स्थितियों में होगा।

मौसम साफ होने तक करें प्रतीक्षा
गेहूं वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल लेने वाले किसानों को सलाह दी है कि कटाई का काम फौरन रोका जाना सही उपाय होगा। जिन खेतों में जल जमाव की स्थितियां बन रहीं हैं उनमें जल निकास की व्यवस्था तत्काल करनी होगी। खलिहान में पहुंच चुकी फसल की मिसाई धूप निकलने के बाद ही करें।

21 मार्च तक ऐसा मौसम
दक्षिण से काफी मात्रा में नमी छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रही है। मजबूत चक्रवाती सिस्टम पश्चिम विदर्भ और करीब के क्षेत्र में सक्रिय है। एक द्रोणिका झारखंड से उड़ीसा होती हुई तटीय आंध्र प्रदेश तक बनी है, तो दूसरी द्रोणिका का फैलाव दक्षिण तमिलनाडु व पश्चिम विदर्भ से होता हुआ कर्नाटक तक विस्तारित है। असर 21 मार्च तक देखा जा सकेगा।

गेहूं के लिए नुकसान
मौसम में आया यह बदलाव गेहूं की फसल के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह होगा। बचाव के उपाय बेहद सीमित हैं। प्रबंधन पर किसानों को ज्यादा ध्यान देना होगा।
- डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
