करें बोनी, बेल वाली सब्जियों की
भूजल स्तर में गिरावट के बीच कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
बिलासपुर। करें बोनी, ऐसी सब्जी फसलों की, जो कम पानी में तैयार होतीं हैं। सब्जी वैज्ञानिकों ने यह सलाह इसलिए जारी की है क्योंकि भूजल स्तर तेजी से गिरने की खबर आने लगी है। इसकी वजह से सब्जी उत्पादन कम होने लगा है। असर तेज होती कीमत के रूप में देखा जा रहा है।
चिंतित हैं सब्जी बाड़ियां क्योंकि बोर से निकल रहे पानी की धार पतली हो रही है। यह स्थिति सीधे सब्जी के उत्पादन को कमजोर कर रही है। उपभोक्ता इसलिए नाराज हो रहा है क्योंकि मांग के अनुरूप उपलब्धता नहीं होने से सब्जियों की खरीदी ऊंची कीमत में करनी पड़ रही है।

इसलिए बेल वाली फसल
करेला, कुंदरु, परवल, लौकी और तुरई ऐसी बेल वाली सब्जी फसलें हैं, जो अल्प सिंचाई में तैयार हो जाती हैं। इनके साथ भिंडी और बरबट्टी की बोनी भी करें। भाजी फसलों में खेड़हा, चेंच और चौलाई की बोनी की सलाह इसलिए दी जा रही है क्योंकि यह शीघ्र तैयार होने वाली मानी जाती है। ऐसी प्रजातियों से फिलहाल परहेज करने की सलाह दी गई है, जो न केवल विलंब से तैयार होती है बल्कि सिंचाई पानी भी ज्यादा मांगती है।

करें ड्रिप इरीगेशन
सब्जी की जिन प्रजातियों की बोनी की सलाह जारी की गई है, उन्हें ड्रिप इरीगेशन से भी तैयार किया जा सकता है। यह पद्धति समय पर सब्जी फसलों की बढ़वार को सुनिश्चित करती है, तो सिंचाई पानी के अपव्यय पर भी रोक लगाती है। साथ ही जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। इससे मानसून के दिनों तक सब्जी की फसल ली जा सकेगी।

सतर्कता यहां ज्यादा
भू जल स्तर में गिरावट की पहली खबर मैदानी क्षेत्र से आ रही है। इसलिए इन क्षेत्रों की सब्जी बाड़ियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। नदी तट, कुएं और तालाब के करीब की सब्जी बाड़ियों में भी बोनी में कम सिंचाई में तैयार होने वाली सब्जी फसलों की बोनी की सलाह दी जा रही है ताकि बोर रिचार्ज होते रहें।

बेल वाली सब्जियां उपयुक्त
भूजल स्तर को देखते हुए सब्जी किसान बेल वाली सब्जी फसल की बोनी की ओर ध्यान दें। इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
-डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
