करें उर्वरक का छिड़काव, रखें जल निकास की व्यवस्था

बिलासपुर। 65 किलो प्रति एकड़ के मान से यूरिया का छिड़काव करें। परिणाम बेहतर उत्पादन के रूप में आएगा। गेहूं की फसल ले रहे किसानों को यह सलाह गेहूं वैज्ञानिकों ने दी है। कहा है कि जल जमाव जैसी स्थिति नहीं बने। इसका भी ख्याल रखें।

असमय हो रही बारिश भले ही दीगर फसलों के लिए नुकसानदेह मानी जा रही हो लेकिन गेहूं की फसल के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि दूसरी सिंचाई के पानी की तैयारी किसान कर रहे हैं। ऐसे में यह स्थिति सिंचाई पर होने वाला खर्च, बचाने वाली मानी जा रही है।

करें छिड़काव यूरिया का

जिस क्षेत्र में बारिश हो रही है, वहां के किसान प्रति एकड़ 65 किलो के मान से यूरिया का छिड़काव कर सकते हैं क्योंकि दूसरी सिंचाई के लायक फसल की उम्र हो चुकी है। बरसती बूंदें यह जरूरत पूरी कर रही हैं। इसलिए यह जरूरी काम अब कर लेना सही होगा। परिणाम बेहतर उत्पादन के रूप में देखा जा सकेगा।

नमी का भी होगा फायदा

बारिश के बाद तापमान का जैसा स्तर बना हुआ है, उससे खेतों में नमी की अवधि ज्यादा दिनों तक बनी रहेगी। पड़ रही ठंड भी फसल के लिए सही है। सीधा लाभ उन किसानों को होगा, जिनके पास सिंचाई के खुद के साधन नहीं है और कुआं, पोखर या तालाब से सिंचाई पानी लेते हैं। याने इस पर किया जाने वाला खर्च बचाया जा सकेगा।

रखना होगा इसका ध्यान

जल जमाव जैसी स्थितियां ना हो। सतत निगरानी रखें। जमाव होने पर जल निकास की नालियों को व्यवस्थित करें ताकि भराव की स्थितियां नहीं हो। बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए इस काम का किया जाना अहम होगा। मिल रही खबरें यह बता रही है कि ऐसी स्थिति फिलहाल नहीं है लेकिन गहराई वाले खेतों की निगरानी और व्यवस्था जरूरी है।


दूसरी सिंचाई की तैयारी कर रहे किसानों को इस बारिश का फायदा होगा। अनुपातिक मात्रा में यूरिया का छिड़काव करें और जल जमाव नहीं होने दें।

  • डा. ए पी अग्रवाल, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, गेहूं, बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

By MIG