उत्पादन सामान्य, कीमत स्थिर



बिलासपुर। बेल की तीन श्रेणियों में खरीदी, इस बरस 4 से 20 रुपए किलो की दर पर की जाएगी। वनोपज कारोबार ने इसकी सूचना संग्राहकों को देते हुए कहा है कि मानक गुणवत्ता वाले बेल की खरीदी सबसे पहले होगी।

बेल से औषधि बनाने वाली ईकाइयां प्रतीक्षा कर रहीं हैं, बेहतर गुणवत्ता वाले बेल की। इधर हवन सामग्री का उत्पादन करने वाले उद्योग भी राह देख रहें हैं। छिटपुट होती आवक के बीच, जो भाव खुले हैं, उसे बेहतर नहीं माना जा रहा है लेकिन गुणवत्ता के मानक पूरा करने वाली उपज को अच्छी कीमत मिलने की संभावना है।

यह प्रथम खरीददार

बेल का प्रथम खरीददार औषधि बनाने वाली इकाइयों को माना जाता है। छत्तीसगढ़ के कुल उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्से की खरीदी करने वाला यह क्षेत्र, इस बार गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। वनोपज कारोबार को भी सतर्कता से खरीदी का संदेश इसने दिया हुआ है।

द्वितीय खरीददार

पूजा-पाठ के बाद हवन के लिए जरूरी सामग्री में भी बेल का उपयोग होता है। इसलिए ऐसी सामग्री बनाने वाली अंतरप्रांतीय और स्थानीय इकाइयां बेसब्री से नई फसल की प्रतीक्षा में हैं। यह दूसरा ऐसा क्षेत्र है, जहां बेल की खपत अच्छी-खासी मात्रा में होती है।

इंतजार यहां भी

गर्मी के दिन हैं। इसलिए शरबत बनाने वाली यूनिटों की मांग निकल रही है। हालांकि यह बेहद सीमित मांग वाला क्षेत्र है लेकिन आने वाले दिनों में यहां से मांग बढ़ने के संकेत हैं। यह इसलिए क्योंकि बेल का शरबत अब बाजार भी पसंद करने लगा है।

ऐसी है कीमत

200 से 400 टन उत्पादन का अनुमान लेकर चल रहे वनोपज कारोबार ने इस बार बेल दो टुकड़ा 7 से 8 रुपए किलो, बेल साबुत 4 से 5 रुपए किलो और बेल गुदा 18 से 20 रुपए किलो की दर पर खरीदी करने की सूचना संग्राहक क्षेत्रों तक भेज दी है। प्राथमिकता इस बरस भी बेमेतरा जिला को ही दी जाएगी।

कीमत स्थिर

बेल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए नई कीमत की जानकारी संग्राहकों को दी जा चुकी है।
– सुभाष अग्रवाल, एसपी इंडस्ट्रीज, रायपुर