निस्तार की समस्या से मिलेगी निजात
भाटापारा। सूखते तालाब। साथ छोड़ते बोरवेल्स। निस्तार की भारी दिक्कत को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर गंगरेल के गेट खोल दिए गए हैं। ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में यह पानी अगले 2 दिन में पहुंचने की संभावना है। इस बीच भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन ने जल की मात्रा बढ़ाने के प्रयास चालू कर दिए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा तालाब भरे जा सके।
शायद यह पहला साल है जब जनवरी मध्य में ही भू-जल स्तर का गिरना चालू हो चुका था। फरवरी की शुरुआत में इसने गंभीर संकट के संकेत दे दिए थे। तेजी से सूखते तालाब और बोरवेल्स निकलने वाली धार के कमजोर होने से यह स्पष्ट हो गया था कि संकट गहराने वाला है। लिहाजा भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन ने अपने स्तर पर प्रयास चालू कर दिए थे।

125 गांवों को मिलेगा पानी
गंगरेल बांध से छोड़ा गया यह पानी भाटापारा विकास खंड के चिन्हित उन 125 गांवों को दिया जाएगा, जो सबसे ज्यादा पानी संकट का सामना कर रहे हैं। अगले 2 दिनों में यह पानी ब्लॉक में प्रवेश कर जाएगा। भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन ने जल की मात्रा को ध्यान में रखते हुए गांव की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है।
200 क्यूसेक रोजाना
गंगरेल बांध से छोड़े गए पानी की मात्रा 200 क्यूसेक रोजाना की होगी। भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन का मानना है कि जरूरत और ग्रामीण क्षेत्रों की मांग को देखते हुए छोड़ी जा रही मात्रा कम है। लिहाजा इसे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं। संकेत सकारात्मक हैं।

बढ़ेगा भू-जल स्तर
एक पखवाड़े तक चलने वाले इस पानी से गिरते भू-जल स्तर को बढ़ाने में भरपूर मदद मिलेगी। जिससे संकट को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। शाखा नहर प्रबंधन ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि पानी का अपव्यय नहीं होने दें।
ग्रामीणों की मांग पर गंगरेल बांध से भाटापारा विकासखंड के लिए निस्तार पानी छोड़ा जा चुका है, प्रथम चरण में 125 ग्राम इससे लाभान्वित होंगे।
– के के खरे, एसडीओ, भाटापारा शाखा नहर संभाग, तिल्दा
