महिला एवं बाल विकास विभाग का मार्गदर्शन, एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा महिला और बाल विकास मेरे लिए विभाग नहीं है मेरा अपना परिवार है। ये केवल प्रमाणपत्र आपको नहीं दिया है। मैंने मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ की जनता की ओर से आपका सम्मान किया है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा एडॉप्ट एन आंगनवाड़ी अभियान चलाया गया और इसका मतलब ही ये है कि समाज को जोड़ा जाए। हम अपनी आंगनवाड़ी को आदर्श कैसे बना सकते हैं। बच्चे कुपोषित ना रहें। महिला बाल विकास विभाग ये संकल्प ले सकता है कि एक साल के अंदर कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं होना चाहिये। आंगनवाड़ी में बच्चों की प्री—स्कूलिंग होगी। इच्छाशक्ति होनी चाहिए, जहां चाह होती है वहां राह को निकलना ही पड़ता है। 912 बेटियां एक हजार बेटों पर जन्म लेती थीं। लाड़ली लक्ष्मी के कारण वह संख्या बढ़कर 956 हो गई है। ओवरऑल लिंगानुपात 970 पर पहुंच गया है। एक हजार बेटे पैदा हों, तो बेटियां भी एक हजार होना चाहिए। एक और संकल्प लेना है कि प्रदेश में कोई भी बच्चा अनाथ ना रहे।
राज्यस्तरीय पुरस्कार हर साल दिए जाएंगे, इसके साथ ही जिला स्तरीय पुरस्कार स्थापित किया जाए, प्रतिस्पर्धा होना चाहिए, कौन सी आंगनवाड़ी सबसे अच्छी है। दिसम्बर के पहले रैंकिंग कर लें और उन्हें पुरस्कृत करने का काम करें। जिन साथियों को सम्मानित किया है उन्हें 25—25 हजार की सम्मान निधि दी जाएगी।
