बिलासपुर । कटघोरा वनमंडल कार्यवाही के अभाव में लापरवाही के शिखर को लांघने से बाज नही आ रहा।इनके गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण एक व्यक्ति की असमय मौत हो गई।दो बुजुर्ग महिलाओं समेत कई लोगों को अपना शिकार बनाने वाले जिस आदमखोर भालू को विभाग ने रेस्क्यू आपरेशन करते हुए पिंजरे में कैद कर अचानकमार अभ्यारण ले जाने के बजाय सुनियोजित तरीके से रात के अंधेरे में बिलासपुर जिले के भनवारटंक जंगल बेपरवाह होकर छोड़ दिया था उस आदमखोर भालू ने बाइक पर सवार होकर जा रहे एक व्यक्ति पर हमला कर उसे बुरी तरह से घायल कर दिया।घायल को उचित उपचार हेतु नजदीकी के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया लेकिन उसकी जान नही बचाई जा सकी और उपचार के दौरान असमय मौत हो गई।लोगों को अपना शिकार बनाने वाला उग्र भालू अब भी भनवारटंक के आसपास रहवासी क्षेत्रों में खुला विचरण कर रहा है जिससे लोगों में भय का वातावरण निर्मित हो गया है।आखिर इस मौत का जिम्मेदार किसे माना जाए।कटघोरा वनमंडल द्वारा जिस प्रकार घोर लापरवाही का एक नायाब नमूना पेश किया वह वाकई निंदकीय है।भालू आदमखोर हो चुका है यह सब जानते समझते हुए भी कटघोरा वनमंडल के द्वारा उठाया गया यह कदम अधिकारी- कर्मचारियों के निष्क्रियता को प्रदर्शित करता है कि कैसे एक नेतृत्वविहीन अधिकारी को कटघोरा वनमंडल का कमान सौंप दिया गया।यदि उक्त वनमंडल की कार्यप्रणाली इसी प्रकार रही तो आने वाले समय मे और भी गंभीर पहलू सामने आ सकते है।फिलहाल इस घटना को अंजाम देने वाला आदमखोर भालू स्वछंद विचरण कर रहा है जिससे आगे भी जनहानि की पूरी संभावना है।भालू के खुलेआम विचरण से आसपास रहवासी क्षेत्रों में काफी भय का माहौल निर्मित हो चुका है।