बिलासपुर। संकट जिस तरह फैलाव ले रहा है उससे निपटने के लिए पुराना धान से पोहा बनाया जाना चालू हो चुका है। सफेदी जरूर कम है लेकिन स्वाद लाजवाब होने की बात कही जा रही है। इधर धान और पोहा में मजबूती लगातार बनी हुई है।

आवक कमजोर। भाव में गर्मी और प्रतिस्पर्धी राज्यों से कड़ा मुकाबला, जैसी स्थिति चालू सप्ताह में भी बनी हुई है। निपटने के लिए जो रास्ता पोहा मिलों ने निकाला है, वह थोड़ा हैरत में इसलिए डाल रहा है क्योंकि चमक याने सफेदी को प्राथमिकता देने वाली यूनिटें इस महत्वपूर्ण गुण से समझौता करने के लिए राजी होने लगीं हैं। यह इसलिए क्योंकि यह प्रयोग स्वादिष्ट पोहा की उपलब्धता, उपभोक्ताओं तक बनाएगा।

सफेदी कम, स्वाद ज्यादा

पोहा क्वालिटी के धान की लगभग शून्य होती आवक के बाद पोहा मिलें खरीफ सत्र 2021 का पुराना महामाया धान का उपयोग पोहा उत्पादन के लिए कर रहीं हैं। कीमत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, इसलिए इसकी खरीदी को प्राथमिकता मिल रही है। जानकारों का कहना है कि पुराना धान से बनाया जाने वाला पोहा तुलनात्मक रूप से सफेदी में कम होता है लेकिन स्वाद में यह नए धान से बने पोहे को मात देने में सक्षम है। चिंवड़ा बाजार में इसकी मांग भी बेहतर निकली हुई है।

महाराष्ट्र के साथ अब दिल्ली भी

पोहा के लिए अपने छत्तीसगढ़ के पास फिलहाल महाराष्ट्र जैसा बड़ा उपभोक्ता राज्य है लेकिन यह गुजरात से पोहा की खरीदी कर रहा है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ की पोहा मिलों ने दिल्ली जैसे नए प्रांत की खोज कर ली है। यह इस समय चिंवड़ा के लिए पोहा की खरीदी में छत्तीसगढ़ को जिस तरह की प्राथमिकता दे रहा है, उसके बाद संकट से निपटने की तैयारी में लगे छत्तीसगढ़ को बड़ा सहारा मिल रहा है।

मजबूती बरकरार

पुराना धान के उपयोग के बाद भी कीमतों में मजबूती बनी हुई है। जहां बीते सत्र का धान,नया धान की तुलना में 50 से 100 रुपए पीछे हैं। वहीं पोहा अब भी 3700 से 4000 रुपए क्विंटल पर मजबूती से जमा हुआ है। बाजार भले ही सौदा और उठाव में पीछे हटता नजर आ रहा है लेकिन विश्वास है कि पर्व और त्यौहार पर इसमें जरूर बढ़त आएगी क्योंकि चिंवड़ा में मांग, वृद्धि का ही संकेत दे रहीं हैं।

पुराना धान से पोहा पहले भी बनाया जाता रहा है। चमक और सफेदी जरूर कम रही है लेकिन स्वाद अच्छा होता है। आवक और बाजार की जैसी स्थिति है, उसमें आने वाले दिनों में सुधार की संभावना है।

कमलेश कुकरेजा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पोहा मिल एसोसिएशन, रायपुर