गणेश पर्व के लिए गांवों में बन रहीं प्रतिमाएं
भाटापारा। अच्छे दिन की उम्मीद को तगड़ा झटका। पहली बार श्री गणेश को प्रतिस्पर्धा के मैदान में देखा जा रहा है। मूर्तिकार तिलक राम वर्मा हैरत में है यह देख कर। कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसा दिन भी आएगा।
गणेश पर्व के लिए लगभग 250 प्रतिमाओं को आकार दे चुके मूर्तिकार तिलक वर्मा की पहली चिंता यह है कि गणेश पंडालों की संख्या कहीं कम न हो जाए। पहली बार यह क्षेत्र जबरदस्त प्रतिस्पर्धा से गुजर रहा है। सामग्रियां जैसे मिट्टी की कीमत पहले से ही परेशान कर रहीं हैं, तो बाद में रंग और पोशाक की बढ़ती दरें हलाकान कर रहीं हैं। रही-सही कसर प्रतिस्पर्धा पूरी कर रही है।

तगड़ी प्रतिस्पर्धा
निपनिया, सिंगारपुर, दतरेंगा सहित तरेंगा, रोहरा और नांदघाट के मूर्तिकारों की नजर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले गणेश पंडालों पर है तो शहर में भी 8 से 10 स्थानों पर डेरा जमाए मूर्तिकार शहरी क्षेत्र से संपर्क का पहला दौर पूरा कर चुके हैं। माना जा रहा है कि पहली बार मूर्तिकारों के साथ श्री गणेश को भी इस प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा।
एक से साढ़े पांच फीट
महामारी के दौर के बाद मनाया जाने वाला श्री गणेश पर्व मूर्तिकारों के लिए सबक लेकर आ रहा है। संकट के दो बरस बाद बेहतरी की उम्मीद में तिलक ने इस बार लगभग 250 गणेश प्रतिमा तैयार कर डाली हैं। इसमें एक फीट से साढ़े पांच फीट की उंचाई वाली प्रतिमाएं मुख्य हैं। जैसा रुझान दिखाई दे रहा है, उसे देखते हुए छोटी प्रतिमाओं की स्थापना इस बरस ज्यादा संख्या में होने का अनुमान है।

मिलेंगे इस कीमत पर
छोटी प्रतिमाएं 200 रुपये में मिलेंगी। तो बड़ी प्रतिमाओं की दर 2000 रुपए से शुरु होंगी। यह 8000 रुपए तक की कीमत के साथ मिलेंगी। इस बार मिट्टी की कीमत दोगुनी देनी पड़ी, तो अन्य जरूरी सामग्रियों में रंग और साज-सज्जा के समान की खरीदी भी लगभग 30 से 40 फीसदी ज्यादा में करनी पड़ी। असर लागत पर पड़ा, जो मूर्तियों की कीमत पर दिखाई दे रहा है।
बेहतरी की उम्मीद तो है लेकिन जैसी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है, वह चिंता में ही डाल रही है।
तिलक राम वर्मा सूरजपुरा
