नहीं हुई महामाया की नीलामी

उठाव की गति धीमी, प्रांगण जाम

भाटापारा। कृषि उपज मंडी के लिए जून का महीना भी परेशानी की वजह बनने जा रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि माह के चालू सप्ताह में ही मंगलवार को जगह की कमी की वजह से भी नीलामी रोकनी पड़ी। किसानों का गुस्सा इस कदर भड़का कि किसी तरह इसे शांत कराया जा सका। अब देखना यह है कि बुधवार का दिन कैसा रहेगा ?

बंपर फसल के बाद रिकॉर्ड आवक से मई का पूरा महीना बदइंतजामी में बीता। अब जून का महीना दस्तक दे चुका है। मानसून करीब आता देखकर किसानों ने आवक बढ़ा दी है लेकिन अव्यवस्था को व्यवस्था में अब तक नहीं बदला जा सका है। इधर आवक और नीलामी के बाद उठाव की गति धीमी है। इसलिए प्रांगण में जगह नहीं बची। ऐसे में नीलामी रोकनी पड़ी। प्रयासों के बाद भी जगह नहीं मिली इसलिए किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। बदइंतजामी को लेकर उपजा यह गुस्सा किसी तरह शांत करवाया गया।

इसलिए रोकनी पड़ी नीलामी

अवकाश के दिन की आवक और सोमवार को आई कृषि उपज की नीलामी के बाद नीलाम हो चुके धान का उठाव इसी दिन की शाम तक हो जाना था लेकिन किसी कारणवश यह काम नहीं किया जा सका। इसका असर मंगलवार को जगह की कमी के रूप में देखने में आया। फलस्वरूप मंगलवार की आवक के लिए ले- देकर जगह बनाई गई लेकिन नीलामी नहीं हो सकी। यह स्थिति देखकर किसान भड़क उठे जिन्हें किसी तरह शांत करवाया गया।

यह भी है वजह

समय पर अनलोडिंग, कटाई, नीलामी के बाद भराई और फिर से मिलों के लिए लोडिंग तक के हर चरण में श्रम की जरूरत अहम हैं लेकिन यह क्षेत्र कतिपय कारणों से नाराज चल रहा है। रही-सही कसर मंडी प्रबंधन की लचर व्यवस्था पूरी कर रही है। लिहाजा प्रबंधन से सभी पक्षों के साथ बैठकर चर्चा और हल निकालने की बात कही जा रही है।

सहयोग इनका भी जरूरी

मानसून करीब है। ऐसे में किसान हित में मिलर्स और श्रम संगठनों से भी, किसान सहयोग की अपेक्षा कर रहे हैं। सभी पक्ष मिल बैठकर समस्या का ऐसा हल शीघ्र निकालें ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियां फिर से प्रांगण में दिखाई ना दें। अभिकर्ता संघ शुरू से किसानों के साथ रहता आया है ऐसे में उनकी बातें भी सुननी होंगी जिसकी अनदेखी हमेशा से की जाती रही है।