मनःस्थिति बदल रही किसानों की
भाटापारा। बड़ा सवाल, क्या मंगलवार को कृषि उपज मंडी में कामकाज सामान्य दिनों की तरह हो पाएगा ? यह इसलिए क्योंकि श्रमिकों की कम संख्या में उपस्थिति से शनिवार को कामकाज कुछ घंटों तक बाधित रहा , इससे किसान तो नाराज हुए ही , साथ ही राईस और पोहा मिलर्स भी परेशान।
मजदूरी दर में वृद्धि की मांग को लेकर चालू माह के पहले सप्ताह में 1 से 7 मई तक कृषि उपज मंडी बंद हो चुकी है। व्यवस्था पटरी पर लौट ही रही थी कि शनिवार को गतिरोध तब बनता नजर आया जब भरपूर आवक के बीच भराई में विलंब को देखकर किसान और मिलर्स नाराज हो गए । देर शाम कामकाज चालू तो हुआ लेकिन मजदूरों की कमी कृषि उपज मंडी के संचालन में बड़ी बाधा बनकर सामने आ चुकी है। रबी फसल की आवक के शुरुआती दिनों में दिखाई देने वाली यह अव्यवस्था विस्तार ना ले पाए , इसके प्रयास जारी तो हैं लेकिन कब सफल होगा ? जैसे सवाल उठने लगे हैं।
इसलिए परेशानी
रबी फसल की आवक चालू हो चुकी है। भरपूर आवक के बीच , समय पर सभी काम हों , इसके लिए पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की मौजूदगी जरूरी है । ताजा स्थितियों में पुरुष एवं महिला श्रमिकों की संख्या बेहद सीमित है जबकि यह संख्या पर्याप्त होनी चाहिए । लगातार मांग के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है । इसकी वजह से ही आवक के दिनों में ऐसी परेशानियां न केवल आती रहती हैं बल्कि आ भी रहीं हैं।
क्या हुआ ? क्या होगा ?
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार को जमकर आवक के बाद , प्रांगण में जैसी स्थिति बनी , उसके बाद भराई का काम सबसे पहले प्रभावित हुआ । कम संख्या में मजदूरों की उपस्थिति से यह काम कछुए की चाल से चलता देखकर नीलामी रोकनी पड़ी । नाराज किसानों का विरोध पहले दिखाई दिया , बाद में मिलर्स भी नाराज दिखाई दिए । ले-देकर मामला सुलझाया गया । देर शाम इसमें नया मोड़ तब आया , जब किसानों ने मंडी प्रशासन को लिखित में सूचना दी कि मंगलवार से नीलामी के बाद अपनी कृषि उपज की भराई वह खुद करेंगे । अब देखना यह है कि इसमें सभी पक्षों की राय क्या होती है ?
संकेत इस बात के
रबी फसल की आवक के शुरुआती दिनों में ही जैसी स्थितियां बन रही हैं उसके बाद किसानों ने पड़ोस की कृषि उपज मंडियों की ओर रुख करना चालू कर दिया है । तो कुछ किसान सीधे मिलों में ही अपनी उपज बेचने का मन बनाते नजर आ रहे हैं । ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि अव्यवस्था जिस तरह फैल रही है , उससे नाराजगी और निराशा ही हाथ आ रही है । दोनों ही स्थितियां सभी पक्षों के लिए नुकसान की वजह बन सकती है।
स्थितियों को देखते हुए किसानों की मांग सही है । अब इस पर मंडी प्रशासन को फैसला लेना होगा ।
राजेश तिवारी, अध्यक्ष अभिकर्ता संघ, कृषि उपज मंडी भाटापारा ।


