मानसून के पूर्वानुमान से बाजार में आई तेजी

बिलासपुर। 4 फ़ीसदी बढ़ोतरी के बाद, इस बरस बारिश से बचाव के लिए जरूरी साधन तिरपाल की खरीदी महंगे में करनी होगी । हद तो तब ,जब मिट्टी की दीवारों को बचाने के लिए प्लास्टिक शीट की भी खरीदी पर किलो पीछे 4 रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे।
मानसून के आने में अब ज्यादा वक्त नहीं रह गया है। ऐसे में तिरपाल उत्पादन इकाइयों में डिमांड पहुंचने लगी है । कोरोना के बाद सामान्य होती कारोबारी गतिविधयां के बाद ,अब वह बाजार अच्छे दिन के इंतजार में है ,जहां केवल बारिश के मौसम में ही खरीदी रहती है , लेकिन तेजी इसमें बड़ी बाधा बन कर पहुंच चुकी है।

तेजी और कीमत

कच्चे तेल में वैश्विक स्तर पर
आई तेजी के बाद प्लास्टिक के दाने का उत्पादन , संकट के दौर से गुजर रहा है । लगभग सभी पेट्रोलियम प्रोडक्ट में आ रही गर्मी से तिरपाल बनाने वाली इकाइयां , किसी तरह मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाकर चल रहीं हैं लेकिन कच्ची सामग्री में आ रही गर्मी के बाद ,असर तिरपाल की कीमत पर पड़ चुका है । इसके बाद मांग में रहने वाले 9×12 साइज का तिरपाल 240 से 400 रुपए में पहुंच गया है ।12×15 साइज की खरीदी के लिए 400 से 600 रुपए देने होंगे तो15 ×18 साइज की खरीदी पर 700 से 1200 रुपए निकालने होंगे। 18×24 साइज के तिरपाल के लिए 1200 से 1800 सौ रुपए खर्च करना पड़ेगा

पहली बार यह वर्ग

कच्चे तेल में आ रही गर्मी और प्लास्टिक के दाने में आई तेजी से पहली बार वह उपभोक्ता भी प्रभावित हो रहा है , जिसका घर मिट्टी से बना हुआ है । ऐसे उपभोक्ता हर बारिश के पहले दीवारों को बचाने के लिए प्लास्टिक शीट की खरीदी करते हैं ।अब इन्हें ऐसे प्लास्टिक शीट की खरीदी 115 से 140 रुपए किलो में करनी होगी । बीते बरस यह 95 से 120 रुपए किलो पर था ।

ऐसे हैं तेवर प्लास्टिक के दाने के

पहले कोरोना , फिर रूस और यूक्रेन के बीच जंग। यह दोनों मिलकर पेट्रोलियम प्रोडक्ट में जैसी गर्मी ला रहे हैं , उससे प्लास्टिक दाना बनाने वाली यूनिटों के सामने अस्तित्व का संकट आकर खड़ा हो चुका है । प्रतिकूल माहौल में जैसी तेजी प्लास्टिक के दानों में आ रही है उसके बाद नई कीमत 155 रुपए किलो पर पहुंच चुकी है।ऐसी स्थिति में अपने प्रदेश की आधी से ज्यादा इकाइयों ने प्लास्टिक शीट का उत्पादन बंद कर दिया है । इसलिए मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है।