मांग का चौतरफा दबाव दे रहा तेजी का संकेत
बिलासपुर। कमजोर फसल+ तेल कंपनियों की खरीदी+ निर्यात+ पर्व एवं त्यौहार की मांग= 30 से 35 रुपए नग नारियल। छू सकता है 40 रुपए का आंकड़ा क्योंकि इसमें अब शॉर्टेज की स्थिति बनती नजर आ रही है।
गुड़, शक्कर, चावल और खाद्य तेलों के बाद अब बारी है उस नारियल की जिसमें भी गर्मी आने लगी है। यह तब, जब पर्व एवं त्यौहारों के दिनों ने दस्तक दे दी है। सांसत में है नारियल बाजार क्योंकि बाद के दिनों में गणेशोत्सव और नवरात्रि जैसे पर्व आएंगे।
कमजोर है फसल
दक्षिण भारत में इस वर्ष नारियल की फसल में रिकॉर्ड 30 फ़ीसदी की गिरावट की खबर है। फलस्वरुप उत्पादक क्षेत्र से देश स्तर पर आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सीजन की चौतरफा मांग के बाद अब उत्पादक क्षेत्र आपूर्ति को सामान्य नहीं बना पा रहा है। इसलिए कीमतें बढ़ाकर नियंत्रित किए जाने की कोशिश की जा रही है। इसका असर घरेलू खरीदी पर पड़ने लगा है।

खरीदी इनकी
निर्यात की राह खुलने के बाद उत्पादक क्षेत्र आपूर्ति में इसको पहली प्राथमिकता दे रहा है। नारियल तेल बनाने वाली इकाइयां दूसरी बड़ी मांग क्षेत्र मानी जाती हैं। संभावित शॉर्टेज की स्थिति को देखते हुए इन्होंने भी खरीदी की मात्रा बढ़ाई हुई है। ऐसे में घरेलू बाजार में शार्टेज आने लगी है। पर्व एवं त्यौहार की वजह से यह डिमांड अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ही है। यही वजह है जिसने नारियल को गर्म किया हुआ है।
30 से 35 रुपए
बेहतर मांग के दबाव के बीच नारियल सूखा 30 से 35 रुपए नग, नारियल कच्चा 28 से 30 रुपए नग जैसी कीमत पर पहुंच चुका है। इस तेजी ने नारियल भेला की कीमत पर भी प्रभाव डाला है, जिसमें प्रति किलो कीमत 380 से 400 रुपए बोली जा रही है। अलबत्ता नारियल खोपरा 260 से 280 रुपए किलो जैसी कीमत पर स्थिर है।