भाटापारा। अब बचत का उपाय भी महंगा हो गया है क्योंकि बढ़ गए हैं दाम मिट्टी के गुल्लक के। पहली बार इस स्थिति को देखकर पालक अब गुल्लक की खरीदी से दूरी बना रहे हैं।

मिट्टी के गुल्लक में कमजोर मांग की आशंका सही साबित हो रही है। कुम्हारों ने इस बार कम ही बनाए थे मिट्टी के गुल्लक लेकिन अब यह भी मांग से बाहर हो चले हैं क्योंकि बीते साल की तुलना में कीमत दोगुनी के करीब है।

इसलिए गुल्लक महंगा

उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी की कीमत में 10% बढ़ोतरी, मजदूरी लगभग दोगुनी, तैयार होने में लगने वाला समय और परिवहन दरों में जोरदार इजाफा। यह कुछ ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से कुम्हारों को गुल्लक के दाम बढ़ाने पड़े। कीमत बढ़ने के बाद कमजोर खरीदी की आशंका पहले से ही कुम्हारों को थी इसलिए कम संख्या में तैयार किया लेकिन अब इनकी भी खरीदी को लेकर आशंकित हैं विक्रेता।

पालकों ने बनाई दूरी

बीते साल की तुलना में लगभग दोगुनी वृद्धि के बाद अब पालक भी मिट्टी के गुल्लक की खरीदी के बजाय अन्य विकल्पों की खरीदी कर रहे हैं। इनमें पहले नंबर पर प्लास्टिक और दूसरे क्रम पर टीन के गुल्लक हैं, जो मिट्टी के गुल्लक की तुलना में न केवल टिकाऊ है बल्कि कीमत भी क्रयशक्ति के भीतर ही है। इसके अलावा रखरखाव भी आसान है।

10 से 250 रुपए तक

निर्माण सामग्री की कीमत जिस अनुपात में बढ़ी हुई है उसके बाद मिट्टी के गुल्लक में शुरुआती दाम 10 रुपए से शुरू हो रहे हैं। अंतिम दाम 250 रुपए प्रति गुल्लक बताए जा रहे हैं। कुम्हारों और विक्रेताओं का मानना है कि कई श्रेणी में बनाए गए इन गुल्लकों को बेहतर प्रतिसाद मिलना था लेकिन शुरूआती रुझान हताश करने वाले माने जा रहें हैं।