कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी का असर

बिलासपुर। अनिवार्य नहीं, औपचारिक उपस्थिति खाता- बहियों की पूजा चौकियों में। पखवाड़ा की जगह सिर्फ तीन दिवस का रह गया है बाजार। इसलिए स्टेशनरी दुकानों ने खरीदी की मात्रा रिकॉर्ड 50 फ़ीसदी घटा दी है।

बेहद कमजोर है खाता-बही का बाजार। इसके बावजूद खाता-बही की कीमतों में 10 से 15% की वृद्धि हो गई है। कंप्यूटर के बढ़ते चलन से पहले ही कमजोर चल रहे खाता-बही की मांग को और भी कमजोर कर दिया है कीमतों में हुई इस वृद्धि ने।

औपचारिक खरीदी

दीपावली पर शुभ-मुहूर्त में नए खाता-बहियों की शुरुआत करने की परंपरा पीढ़ियों से रही है लेकिन बीते पांच सालों से कम्प्यूटर के बढ़ते उपयोग के बाद खाता-बही का चलन तेजी से कम हुआ है। सामानांतर में निर्माण और विक्रय में भी गिरावट आई है लेकिन इस बरस यह गिरावट इसलिए ज्यादा हैरान करने वाली मानी जा रही है क्योंकि खुदरा बाजार ने अग्रिम सौदे में रिकॉर्ड पचास फीसदी की कटौती कर दी है। इसके बावजूद उपलब्ध खाता-बही में खरीदी लगभग शून्य ही है।

निर्माण लागत में जोरदार इजाफा

खाता-बहियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कागज की जरुरत होती है। जरुरी सामग्रियों में स्याही, पहले से ही तेज है। कपड़े के कवर भी महंगे हो चले हैं। इसके अलावा कुशल श्रम भी महंगा हुआ है। तैयार होने के बाद गंतव्य तक पहुंचने के लिए परिवहन दरों में भी वृद्धि जारी है।इन सभी महत्वपूर्ण कारकों से खाता-बहियों की कीमत में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।

खुदरा बाजार की बढ़ रही परेशानी

अग्रिम खरीदी में उल्लेखनीय पचास फीसदी की कटौती के बावजूद खुदरा बाजार परेशान है क्योंकि खाता-बहियों में खरीदी तो दूर,पूछ-परख तक नहीं है।यह तब, जब मांग के लिए महज एक या दो दिन शेष रह गए हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि खाता-बहियों के बाजार में शेष सामग्रियों की वापसी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए व्यक्तिगत संपर्क करके व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है।