रायपुर। गिर चुकी फसलों के दाने अंकुरित होंगे। खड़ी फसल पर माहो और पेनिकल माईट जैसे घातक कीट का अटैक। गुणवत्ता में 15 से 20 प्रतिशत की कमी लाएंगी यह दोनों स्थितियां।
धूप निकलने के बाद कट चुकी फसल को कम से कम तीन से चार दिन तक अच्छी तरह सुखाना होगा। गिरी हुई फसलों वाले खेतों से जल निकासी की व्यवस्था फौरन करनी होगी क्योंकि अंकुरण का खतरा है। सतर्कता खड़ी फसलों को लेकर भी बरतनी होगी क्योंकि माहो और पेनिकल माईट जैसे घातक कीट अटैक के लिए तैयार है।

खतरा अंकुरण का
कट चुकी और गिरी हुई फसलें अब अंकुरण की जद में आती नजर आ रहीं हैं। पानी और मिट्टी के संपर्क में आने के बाद दानों में फिर से अंकुरण होना तय है। बचाव के बेहद सीमित उपायों के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जल निकासी की व्यवस्था फौरन करें ताकि अंकुरण जैसा खतरा कम किया जा सके। यह काम धूप निकलने तक नियमित रूप से करना होगा।
खड़ी फसलों को ऐसा नुकसान
मध्यम एवं दीर्घ अवधि में तैयार होने वाली फसलें भी खतरे में हैं क्योंकि मौसम में यह बदलाव माहो और पेनिकल माइक जैसे घातक कीट को हमले के लिए माकूल मौका दे रहा है। शिकायतें तो थीं लेकिन अब यह तेजी से और बढ़ेंगी क्योंकि तापमान, नमी और बेमौसम बारिश का पूरा साथ मिल रहा है माहो और पैनिकल माईट जैसे घातक कीटों को।

गुणवत्ता में आएगी कमी
आ सकती है बदरा की शिकायतें। अपुष्ट दानों का आना भी संभावित है। प्राकृतिक चमक में भी कमी तय मानी जा रही है। ऐसी प्रतिकूल स्थितियों की वजह से गुणवत्ता में 15 से 20 फ़ीसदी की गिरावट तय मान रहे हैं कृषि वैज्ञानिक। इनमें और वृद्धि नहीं होने पाए इसके लिए जरूरी उपायों का किया जाना आवश्यक माना जा रहा है।
वैज्ञानिक प्रबंधन ही बचाव का प्रभावी उपाय
बेमौसम बारिश से धान की गुणवत्ता और उपज दोनों प्रभावित हो सकती हैं। गिरी फसल में दानों के अंकुरण को रोकने के लिए तत्काल जल निकासी करें तथा कटी फसल को 3–4 दिन अच्छी तरह सुखाएं। वहीं, खड़ी फसल में माहो एवं पैनिकल माइट की नियमित निगरानी करें। समय पर सावधानी और वैज्ञानिक प्रबंधन ही संभावित नुकसान से बचाव का प्रभावी उपाय है।
डॉ. एस.आर. पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट (एग्रोनॉमी), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर