रतनपुर। प्रशासन ने पटाखा दुकानों की स्थापना में जिन सामानों जैसे कपड़ा, बांस रस्सी, प्लास्टिक के तिरपाल टेंट इत्यादि का उपयोग नहीं करने एडवाइजरी जारी की है, उन्ही सामानों का ही उपयोग कर राष्ट्रीय महत्व के भारत सरकार द्वारा संरक्षित हजार साल पुराने स्मारक के करीब दुकानें सजाकर बारुद का ढेर लगाने की तैयारी की जा रही है। आश्चर्यजनक जनक बात ये भी है कि जिस संस्थान की बाजार लगवाकर सरकार के राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी है उससे तव प्रावधानों के तहत अनुमति और अनापत्ति लेने तक की जहमत नहीं उठाई गई है। ऐसे किसी गंभीर हादसे की स्थिति में किस पर जिम्मेदारी तय होगी। शहर में किसकी सरकार और मनमानी चल रही है। इनमें जनता से निर्वाचित ‘गण’ कहां किसकी शह पर तंत्र, ‘गण’ पर सवार हो गए हैं।
सर्व विदित है कि रतनपुर महामाया की नगरी है। जहां अजब गजब किस्सों का हो जाना स्वाभाविक मान लिया जाता है। ये भी कह सकते हैं कि लोगों को इसकी आदत भी हो चुकी है। आच जब तक देहरी तक नहीं पहुंचता लोगों को फर्क भी नहीं पड़ता। अब फिर शहर में चर्चा है कि शहर में सरकार किसकी है। लोगों ने तो शहर से लेकर सेंट्रल तक ट्रिपल इंजन की सरकार चुन रखी है। फिर जनता के चुने ‘गण’ पर तंत्र कैसे शनि होकर साढ़े साती लगा रहा है। दीपावली हर्ष उल्लास का पर्व है। प्राचीनतम रसूख का शहर है तो जमकर आतिशबाजी भी होती है। पंचायत के जमाने से ही पटाखों के बाजार सजाने की जिम्मेदारी परिषद् की रही है। इसकी पूरी व्यवस्था नगर पालिका प्रशासन ही करता रहा है। इस व्यवस्था से शासन को राजस्व भी मिलते हैं। बढ़ती आबादी और बसावटों के हिसाब से पटाखों के बाजार की जगह भी बदलते रहे हैं। आजादी के 79 बरसों में पांच हजार आबादी का ग्राम पंचायत अब करीब 32 हजार जन मानस के साथ नगर पालिका परिषद का रुतबा भी हासिल कर चुका है। अब के बीते वर्षों तक नगर पालिका परिषद कृषि उपज मंडी परिसर की खाली जगह में ही पटाखा बाजार लगाने की व्यवस्था करता रहा है। इस बार तो यहां पटाखा बाजार लगने की को सुगबुगाहट नहीं है। दो दिन बाद दीपोत्सव का पर्व शुरू भी हो जाएगा। फिर पटाखा बाजार कहां ? जानकारी लगी कि अब कि बार पटाखा बाजार महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर की मंदिर परिक्षेत्र स्थित खाली जमीन पर लगाई जा रही है। इसके लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोटा द्वारा अनुमति देने की बात कही गई है हालांकि कि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। पटाखा दुकानों का निर्माण प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी को दरकिनार कर उन्ही सामानों से किया जा रहा है जिसके उपयोग पर स्पष्ट लोक लगाई गई है।

इससे भी गंभीर बात तो पटाखा दुकान लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा हजार साल पुरानी संरक्षित घोषित राष्ट्रीय स्मारक की सुरक्षा को भी दांव पर लगा दिया गया है। प्राचीन संस्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम 2010 द्वारा यथा संशोधित प्राचीन संस्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्राविधान के अन्तर्गत संरक्षित सीमा से 100 मीटर तक और इसके आगे 200 मीटर की परिधि का क्षेत्र खनन व निमर्माण कार्य के लिए क्रमशः प्रतिषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्र घोषित किये गये है। अब यह जांच का विषय है कि लगाया जा रहा पटाखा बाजार दो सौ मीटर की परिधि से बाहर है कि नहीं ? इधर नगर पालिका प्रशासन के पास इन दिनों अग्निशमन वाहन तक व्यवस्था नहीं है फिर नगर पालिका प्रशासन की सहमति के बिना कौन सा सुपर पावर पटाखा बाजार लगाकर इस दीपावली शहर सरकार की साख को धुंआ धुंआ करने की जुगत लगा रहा।

पटाखा दुकानों को लेकर जारी एडवाइजरी
स्थायी/अस्थायी पटाखा दुकानों में आग लगने से बचाव के लिए नगर सेना, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा एसडीएआरएफ, मुख्यालय छत्तीसगढ़ सेेक्टर 19 अटल नगर नवा रायपुर से एडवाइजरी जारी किया गया है। पटाखा दुकान किसी भी ज्वलनशील पदार्थ जैसे कपड़ा, बांस रस्सी, टेंट इत्यादि का न होकर, अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड द्वारा निर्मित होना चाहिए। पटाखा दुकान एक दूसरे से कम से कम तीन मीटर की दूरी (साइड) पर एवं एक दूसरे के सामने न बनायी जाए। पटाखा दुकानों में प्रकाश व्यवस्था हेतु किसी भी प्रकार के तेल का लैंप, गैस लैम्प एवं खुली बिजली बत्ती का प्रयोग प्रतिबंधित है। किसी भी पटाखा दुकान से 50 मीटर के अंदर आतिशबाजी प्रदर्शन प्रतिबंधित है। विद्युत तारों में ज्वाइंट खुला नहीं होना चाहिए । प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्युज या सर्किट ब्रेकर लगा होना चाहिए, जिससे शार्ट सर्किट की स्थिति में विद्युत प्रवाह स्वतः बंद हो जाए। दुकाने ट्रांसफार्मर के पास न हो और उनके ऊपर से हाई टेंशन पावर लाइन न गुजरती हो। प्रत्येक पटाखा दुकान में 5 कि.ग्रा. क्षमता का डीसीपी अग्नि नामक यंत्र होना चाहिए (इसकी मारक क्षमता 6 फीट की होती है)। दुकानों के सामने कुछ अंतराल में 200 लीटर क्षमता के ड्रम की व्यवस्था बाल्टियों के साथ होनी चाहिए। पटाखा दुकानों के सामने बाइक/कार की पार्किंग प्रतिबंधित होना चाहिए। अग्निशमन विभाग एवं एम्बुलेंस का फोन नंबर, दुकान परिसर के कुछ स्थानों में लगाया जाए। अग्निशमन वाहन के मूवमेंट के लिए पर्याप्त होना चाहिए।अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने पर जांच कर छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन नियमावली 2021 के तहत कार्यवाही की जाएगी।