दरवाजे पर दीपक नहीं, करोड़ों के सपने, पड़ोसी से मांग रहे कारीडोर बनाने एक अरब उनचास करोड़ रुपए
बिलासपुर लोक सभा क्षेत्र के सांसद तोखन साहू सौभाग्य से राज्य मंत्री आवासन एवं शहरी विकास कार्य मंत्रालय भारत सरकार भी हैं। इन दिनों वे अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को रतनपुर में मां महामाया कारीडोर के नाम पर एक अरब उन्नचास करोड़ के सपने बेंच रहे हैं। बड़े अखबारों में इसकी खूब चर्चा, गाहे-बगाहे होती रहती है। अभी नवरात्र के पहले दिन एक बड़े अखबार का बड़ा स्पेश इसके लिए समर्पित था। सांसद का दो साल से अधिक का कार्यकाल बीत चुका है। केंद्रीय राज्य मंत्री के रुप में आवासन एवं शहरी विकास कार्य मंत्रालय भारत सरकार का अपना एक बजट भी होता होगा। गूगल सर्च के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवासन एवं शहरी विकास कार्य मंत्रालय भारत सरकार को (Ministry of Housing & Urban Affairs) को कुल ₹85,522 करोड़ का बजट आवंटित है। देशभर के इस बजट से रतनपुर के हिस्से में आठ करोड़ चौसठ लाख छहसठ हजार रुपए (864.66 लाख) ही आए हैं। (पूरे संसदीय क्षेत्र में उनके विभाग से कितना आबंटन मिला है इसकी जानकारी हमें नहीं है मिलेगा तो बताएंगे जरुर) उन्होंने रतनपुर नगर पालिका परिषद को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत 864.66 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है। जिसका भूमि पूजन प्रतीक्षित है। वहीं अपने घोषित मां महामाया कारीडोर के लिए एक अरब उनचास करोड़ की राशि के लिए उन्होंने केंद्रीय पर्यटन मंत्री से उम्मीद की है। भारत सरकार के केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का पूरे देश के लिए बजट गूगल सर्च के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹ 2,438.40 करोड़ निर्धारित है। ऐसे में देश के कुल बजट का सत्रह फीसदी हिस्सा छत्तीसगढ़ के सिर्फ एक गंतव्य के लिए आबंटित हो पाना संभव है क्या ? अगर ये हो जाए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। इससे इतर माननीय मंत्री को अपने विभाग के बजट में इसके लिए गुंजाइश तलाशनी चाहिए। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवासन एवं शहरी विकास कार्य मंत्रालय भारत सरकार को (Ministry of Housing & Urban Affairs) को कुल ₹85,522 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। देश के इस बजट से रतनपुर के हिस्से में आठ करोड़ चौसठ लाख छहसठ हजार रुपए (864.66 लाख) ही आ पाना क्या कहता है। सांसद ने शहर के तीन तालाबों की दशा और दिशा सुधारने में भी रुचि दिखाई है। अतिक्रमण के पार इसका फलीभूत होना चमत्कार ही होगा। हम उम्मीद जताएं कि ये चमत्कार फलीभूत हो ही जाए।

इन तथ्यों पर हम सुधि पाठकों का ध्यान इसलिए भी आकर्षित कर रहे हैं क्योंकि कि कुछ ऐसे ही सपने तब के बिलासपुर लोकसभा के सांसद और अब के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी दिखाई थी। भारत सरकार की प्रसाद योजना में रतनपुर स्थित मां महामाया देवी मंदिर को जोड़ने पांच साल तक दावें करते रहे। तब भी इसे लेकर अखबारों में बड़ी बड़ी खबरों के ऊपर आकर्षक शीर्षक सजते रहे हैं। तब के सांसद अरुण साव अब के अधिकार संपन्न उप मुख्यमंत्री है। छत्तीसगढ़ शासन का नगरीय प्रशासन विभाग, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और खेल एवं युवा कल्याण विभाग उनके ही अधिनस्थ है। जिसका अपना अरबों रुपए का विभागीय बजट भी है जिससे वे इस अंचल के लिए संजोये सपनों को जमीन पर साकार कर सकते हैं। मां महामाया के शहर रतनपुर के लिए दिल में कहीं जगह है तो अपने विभागों के बजट में भी इसके लिए पगदंडी (कारीडोर) तैयार होनी चाहिए। पर क्या जमीन पर ऐसे दिल की बातों की तस्वीरें दिखती है ? बिल्कुल नहीं ।

उपमुख्यमंत्री के ही नगरीय प्रशासन विभाग ने रतनपुर शहर को अंधेरे में डूबा रखा था। शहर की सड़कों पर राहगीर धूल फांक रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने रतनपुर नगर पालिका परिषद को शहर की सड़कों को आधुनिक खंबों के साथ रोशन करने करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए आबंटित किए थे। नगरीय निकाय चुनाव के ठीक पहले का इसका काम आनन फानन में तत्कालीन परिषद की निगरानी में कराया गया। सरकार से मिली राशि की ऐसी बंदरबांट हुई कि शहर में लगे साढ़े तीन करोड़ रुपए लागत के खंबे और बिजली साल भर में ही कबाड़ हो गए। जहां रोशनी बिखरनी थी वहां अंधेरा पसरा है।शिकायतें हुई सरकार बदली और ट्रिपल इंजन की सरकार में सब कुछ पाक और साफ होना दिख रहा है। वो जो नहीं दिख रहा वो अंधेरे में रोशनी है।

शासन प्रशासन में शिकायतों के झोले कहां टंगे हैं किसी को खबर है क्या ? रतनपुर एन एच 130 खंडोबा मंदिर से लेकर शहर की सभी गलियों में अंधेरा पसर गया। इसके साथ ही पक्ष-विपक्ष स्थानीय जनप्रतिनिधि प्रतिनिधियों में मुर्दानगी छाई है। इससे किसी को सरोकार है क्या?
नवरात्र का पर्व चल रहा है अर्दली से लेकर कलेक्टर, मंत्री-संत्री सबकी हाजिरी शीश झुकाने, सुख-संपन्न का आशीर्वाद लेने हो रही है। इनमें से कई जिम्मेदार भी है जिनका शर्म मर चुका है। जिनको लक्जरी गाड़ियों के शीशे से बाहर की जमीन नहीं दिखती। जहां जन, गण, मन रहते हैं। यहीं की माटी से बने दीयों में देश और विदेश के तीस हजार आस्था के ज्योति मनोकामना के लिए प्रज्ज्वलित है। जिसके लिए इन सब ने करीब ढाई करोड़ रुपए दिए है। अब इस शहर के दर-बदर को भी उम्मीद है, कोई जब आएं तो रोशनी के लिए एक दीपक टिमटिमाता रहे। जिसके उजास से शहर का कोना कोना रोशन हो और उम्मीद बची रहे…

कोशिश अच्छी है, जारी रहे …
जिस शहर में देश विदेश के तीस हजार लोगों के मनोकामना की ज्योति कलश प्रज्ज्वलित है उसी शहर के प्रवेश द्वार से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों की सड़कों में नवरात्रि जैसे महापर्व पर अंधेरे का साम्राज्य है। राहगीर धूल फांक रहे हैं। ये तो भला हो नगर पालिका परिषद अध्यक्ष लवकुश कश्यप की जिसकी पहल पर आनन फानन में बस स्टैंड से लेकर हाई स्कूल चौक तक नया केबल लगाकर स्ट्रीट लाइट की रोशनी की बहाल की गई है। बाकी शहर में तो अब भी जनप्रतिनिधियों के मुर्दा सन्नाटे के साथ अंधेरा ही पसरा है।