कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने कोई तैयार नहीं
बलौदा बाजार। भाटापारा-कोढ़ा में धूल और गर्दा। चना एवं उड़द चूनी में मिट्टी तथा कंकड़। पोहा चूनी में सफाई के दौरान निकला कचरा। बेखौफ हैं पशु आहार के थोक एवं चिल्हर विक्रेता क्योंकि जांच से दूरी बनाई हुई है जिम्मेदार शासकीय एजेंसियों ने।
नाराजगी बढ़ रही है पशुपालकों की। गुस्सा बढ़ रहा है, डेयरी संचालकों में गुणवत्ताहीन पशु आहार की जांच को लेकर प्रशासनिक उदासीनता से। किससे करें शिकायत? किसे दें वस्तु स्थिति की जानकारी? यह यक्ष प्रश्न इसलिए क्योंकि पशु आहार की जांच को लेकर एक दूसरे को जिम्मेदार बता रहीं हैं शासकीय एजेंसियां।
संदेहास्पद इनकी गुणवत्ता
कोढ़ा, पशु आहार में सबसे ज्यादा बिकने वाला आहार है, अनुपात में शिकायतें भी खूब हैं धूल और गर्दा के होने की। दूसरे और तीसरे क्रम पर चना और उड़द चूनी है। इनमें मिट्टी और कंकड़ की शिकायत पशुपालक हमेशा से करते आए हैं। चौथे नंबर पर खल्ली है, जिसमें विक्रय से बच गई खल्ली के मिश्रण की जानकारियां हमेशा पशुपालक देते रहे हैं लेकिन अनसुनी कर दी जा रहीं हैं यह जानकारियां।

पूरे प्रदेश से शिकायतें
दाल, चावल और पोहा प्रसंस्करण इकाइयां प्रदेश में सबसे ज्यादा अपने ही जिले में हैं। इस लिहाज से भारी मात्रा में पशु आहार निकलता है इन प्रसंस्करण इकाइयों से। डेयरी की मांग शहर से तो है ही, साथ ही प्रदेश के लगभग सभी जिलों को भी पशु आहार की सप्लाई होती है। इसके अलावा आंशिक मात्रा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को भी भेजी जाती हैं। शिकायतें यहां से भी हैं गुणवत्ता को लेकर।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
1- पशु आहार की जांच पशु चिकित्सा विभाग के अधीन है।
-लक्ष्मण कश्यप, खाद्य निरीक्षक, बलौदा बाजार
2- शिकायतों की जांच का अधिकार हमें नहीं है।
-डॉ एन के सिंग, उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, बलौदा बाजार
3-पैक्ड पशु आहार के लिए फेसाई से लाइसेंस जारी होता है। पशु आहार की जांच की जिम्मेदारी हमारी नहीं है।
-अक्षय सोनी, अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, बलौदाबाजार