शगुन वाली राखियों में बढ़ रहा रुझान

भाटापारा। रुझान शगुन वाली राखियों में। मांग में आने लगीं हैं मौली, डोरी और पेंडेंट राखियां। बड़ा बदलाव यह कि प्लास्टिक की राखियां पूरी तरह गायब हो चुकीं हैं।

रक्षाबंधन 28 अगस्त को। थोक के बाद अब खुदरा बाजार में राखियां नजर आने लगी हैं लेकिन इस बार उपभोक्ता खरीदी 10 से 15 फ़ीसदी तेजी के बीच करनी होगी क्योंकि आधार सामग्रियां महंगी हो चुकीं हैं।

शगुन वाली राखियां

मौली, डोरी और पेंडेंट राखियों की खरीदी को लेकर जैसा रुझान बना हुआ है उससे खुश है राखी बाजार। हालांकि तेज तो है कीमत लेकिन फिर भी खरीदी की गति को उत्साह बढ़ाने वाला मान रहा है राखी बाजार। कीमत की बात करें तो मौली 5 रुपए, डोरी 2 से 40 रुपए और पेंडेंट 10 से 400 रुपए में मिलेंगी। इन तीनों में मौली और पेंडेंट को जोरदार प्रतिसाद की धारणा है।

प्लास्टिक आउट

प्लास्टिक के दानों का आयात बंद। उपलब्ध दाने दोगुने महंगे। इन दो प्रमुख वजहों ने पहली बार प्लास्टिक की राखियों को बाहर कर दिया है। जो राखियां मिल रहीं हैं वह बीते पर्व की शेष राखियां है लेकिन इनकी खरीदी को लेकर रुझान नहीं है। पहली बार ग्रामीण क्षेत्र भी इसकी खरीदी को लेकर निरुत्साहित हैं। इसके अलावा ऐसी राखियां जो स्पंज से बनाई जाती थी। वह भी चलन से लगभग बाहर हो चली है।

10 से 15 फ़ीसदी तेजी

कच्ची सामग्री महंगी। श्रम महंगा। परिवहन व्यय भी बढ़ा हुआ है। फलस्वरुप काउंटर तक पहुंच 10 से 15 फ़ीसदी तेजी के बीच हो रही है। ऐसी स्थितियों में 20 से 25 फ़ीसदी अतिरिक्त खर्च करने पर ही राखियों की खरीदी कर पाएंगी बहनें। इस वृद्धि के बावजूद खरीदी को लेकर हो रही पूछताछ को देखते हुए बेहतर मान रहा है राखी बाजार।

शगुन वाली राखियां मांग में

मौली, डोरी और पेंडेंट राखियां हमेशा से शगुन वाली राखियां मानी जाती रही हैं। इसमें जैसा रुझान बन रहा है उससे बेहतर की धारणा है।
-बिहारी जोशी, श्री गणेश सीजनल शॉप, भाटापारा