“ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” पहुंची बिलासपुर

बिलासपुर। आजाद हिंदुस्तान का स्वप्न जिन्होंने भी देखा चाहे वो गाँधी हों, नेहरू हों, भगत सिंह हों, अम्बेडकर हों या देश की आज़ादी के लिए मर मिटने वाले लाखों अंजान देशभक्त सभी का स्वप्न एक भले न हो पर धारा एक थी कि समता, भाईचारा, न्याय और बंधुत्व की मूल भावना के साथ देश का निर्माण हो और इसी मार्ग पर चलते हुए देश आंगे बढ़े, लेकिन आज जब हम इन मानव मूल्यों को केंद्र में रखकर अपने देश की बात करते हैं तो हमें नफ़रत, साम्प्रदायिकता का बोलबाला दिखाई देता है। इप्टा की यात्रा नफ़रत और साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ जनता के बीच प्रेम, मोहब्बत और भाईचारे का बीज बो रही है। यह बात झारखण्ड इप्टा के महासचिव शैलेन्द्र ने बिलासपुर के सिम्स आडीटोरियम में “इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” के उद्देश्य को लेकर कही।

आज़ादी के 75वें साल के अवसर पर देश की जनता के बीच प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की संस्कृति का संदेश देते हुए भारतीय जन नाट्य संघ ‘इप्टा’ द्वारा निकाली जा रही “ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” दूसरे दिन रायपुर से दामाखेड़ा और सरगांव होते हुए बिलासपुर पहुंची। इस यात्रा में देश भर के अनेक रंगकर्मी चल रहे हैं ।

इप्टा ने किया जनता को जगाने का काम

स्वतंत्रता आंदोलन में इप्टा की भूमिका को लेकर इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा ने कहा कि इप्टा से जुड़े कई स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और अत्याचार का विरोध करते हुए कई बार जेल गए। बंगाल के भीषण अकाल के दौरान इप्टा ने देश भर में कला के माध्यम से अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए मदद जुटाने का काम किया। देश की जनता को बताया कि बंगाल भूखा है और यह दैवी प्रकोप के चलते नहीं बल्कि अंग्रेज सरकार की अमानवीयता के चलते, कालाबाजारी के चलते, आप अकाल पीड़ित जनों की मदद कीजिये। इप्टा के साथियों ने जनता को झकझोरने का काम किया, जगाने का काम किया।

राजबली को किया याद

राकेश वेदा ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी और नाटककार राजबली यादव को याद करते हुए बताया कि यादव 1942 में आज़ादी के आंदोलन में शामिल हुए और अंग्रेज सरकार ने भरी बरसात में उनका घर ढहा दिया गया और उनकी मा भींगती रहीं और गांव का कोई भी व्यक्ति उनकी सहायता के लिए नहीं आया। राजबली यादव पकड़े गए और बाद में जेल से छूटने के बाद भी उन्होंने लड़ाई जारी रखी। आज़ादी के बाद जमीदारी प्रथा के खिलाफ़ लड़ते हुए जेल गए। उन्होंने ‘धरती हमारी है नाटक’ की रचना की और सैकड़ों बार इस एकल नाटक का प्रदर्शन किया। इप्टा के दूसरे साथी राजेंद्र रघुवंशी से जुड़े किस्से के जिक्र के साथ राकेश ने बताया कि इप्टा के साथियों की एक लम्बी फेहरिस्त है आज़ादी के आंदोलन में अपना योगदान देने कि और आज़ादी के बाद भी लगातार हर तरह के जुल्म और ज्यादती के खिलाफ़ आवाज बुलंद करने की।

लोकरंग की छटा बिखरी

सिम्स आडिटोरियम में कार्यक्रम की शुरुआत इप्टा के साथियों ने जनगीत की प्रस्तुति देकर की। किशोर कलाकार राघव दीक्षित ने छत्तीसगढ़ राजकीय गीत को बासुरी वादन के माध्यम से मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार का सम्मान किया गया। सूफी भजन गायक नरेन्द्र पाल ने भजनों की प्रस्तुति दी। रेखा देवार और उनके साथियों ने छत्तीसगढ़ी लोक गायन की प्रस्तुति दी।कार्यक्रम के आखिर में नाचा थियेटर के साथियों ने गीतों और नृत्य व संवादों के संयोजन के साथ छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति का नाट्य रूप गम्मत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन इप्टा बिलासपुर के सचिव सचिन शर्मा ने किया।

रायपुर से बिलासपुर के बीच में सांस्कृतिक यात्रा कबीर के धाम दामाखेड़ा और सरगांव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हुए और जनता से संवाद करते हुए बिलासपुर पहुंची। सोमवार की सुबह सीएमडी महाविद्यालय आडीटोरियम बिलासपुर में इप्टा के वरिष्ठ साथियों ने युवाओं के साथ बातचीत कर इप्टा के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। गौरतलब हो कि रायपुर से 9 अप्रैल को शुरू हुई इप्टा की “ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश से होते हुए मध्यप्रदेश पहुंचेगी और इंदौर में 22 मई को समापन होगा।