निस्तारी के लिए भरे जाएंगे तालाब

भाटापारा। निस्तारी पानी के लिए गंगरेल बांध के गेट खोल दिए गए हैं। देर शाम यह पानी विकासखंड से प्रवेश की संभावना है। पंचायतों को इस बार बेहद सावधान रहकर निस्तारी तालाबों को भरना होगा क्योंकि प्रबंधन ने न केवल पानी की मात्रा कम कर दी है बल्कि प्रवाह के दिन भी घटा दिए हैं।

बोर साथ छोड़ रहे हैं। कड़कती धूप से तालाब तेजी से सूखने लगे हैं। ऐसे में लगभग हर गांव पेयजल के साथ निस्तारी पानी के संकट का सामना कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन की मांग पर रविशंकर जलाशय याने गंगरेल बांध प्रबंधन ने भाटापारा ब्लॉक के लिए बांध के गेट खोल दिए हैं। यह पानी देर शाम ब्लॉक की सीमा में प्रवेश करने की संभावना है।

मिलेगा इतना पानी

गंगरेल बांध प्रबंधन ने भाटापारा ब्लॉक के लिए महज 125 क्यूसेक पानी की मात्रा तय की है। डिमांड 400 क्यूसेक की थी लेकिन चारों तरफ की मांग और जलाशय में जल भराव की स्थिति देखने के बाद यह तय किया गया कि सर्वाधिक संकटग्रस्त गांव की जरूरत पहले पूरी की जाएगी। फिलहाल ऐसे संकट की संभावना अपने ब्लॉक में कम ही है।

इसलिए दिक्कत

गर्मी ने अभी दस्तक दी ही है लेकिन यह जिस रूप में तेवर दिखा रही है, उसके बाद तालाबों का पानी तेजी से तलहटी में सिमटता जा रहा है। सरकारी और निजी बोर की भी हालत बेहद दयनीय हो चली है। खबरों के मुताबिक यह भी तेजी से साथ छोड़ने लगे हैं। संकट की स्थिति और बढ़ने ना पाए इसलिए निस्तारी तालाबों को भरने के लिए बांध के गेट खोल दिए गए हैं।पंचायतों को अलर्ट

पंचायतों को अलर्ट

भाटापारा शाखा नहर प्रबंधन ने पंचायतों को अलर्ट किया है कि वे नहर के जरिए पहुंच रहे पानी के प्रवाह पर पूरी नजर रखें। प्राथमिकता वाले तालाब पहले भरें। ध्यान रखें कि तटबंध ना काटे जाएं और नहर का पानी खेतों में ना भरने दें। पानी बर्बादी पर भी नजर रखी जाए। लिहाजा इस बार पंचायतों को इस काम में गंभीरता दिखानी होगी।

टेल एरिया में होने की वजह से भाटापारा ब्लॉक को पानी देने में विलंब हुआ लेकिन अब स्थिति सामान्य हो सकेगी। गंगरेल से छोड़ा गया पानी देर शाम तक ब्लॉक में प्रवेश कर जाएगा।

  • के के खरे, एसडीओ, भाटापारा शाखा नहर, तिल्दा