कृषि छात्रों के व्यक्तित्व विकास एवं कैरियर के अवसर विषय पर दो दिवसीय सेमिनार शूरु

बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की पहल

बिलासपुर । किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान वहां के विद्यार्थियों तथा शिक्षा से होती है। शिक्षा ऐसी होना चाहिए जो लोगों को स्वीकार्य हो। गुणवत्ता युक्त शिक्षा समय की मांग है।यह बात डॉ. गिरीश चंदेल कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने कही।

राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के वित्तीय सहयोग एवं कैरियर डेवलपमेंट सेंटर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में 21 व 22 मार्च को “कृषि छात्रों के व्यक्तित्व विकास एवं रोजगार के अवसर” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है । “कृषि छात्रों के व्यक्तित्व विकास एवं कैरियर के अवसर” विषय पर आयोजित सेमिनार के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अपार संभावना है । कोई भी व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए अन्वेषण का होना अति आवश्यक है, ताकि वह उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की दूरी को मिटा सके। किसी भी व्यवसाय के मुख्यता तीन आधार होते है, अन्वेषण, तकनीक का सही उपयोग एवं विपणन। छात्रों में अन्वेषण, तकनीक एवं विपणन को संतुलित करने के लिए भौतिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्थिरता का होना आवश्यक है। छात्रों के स्वयं के व्यवसाय को प्रारंभ करने से पूर्व उसका आर्थिक विश्लेषण करना आवश्यक है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास है कि वह प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर नए कृषि उद्यमी तैयार कर उन्हें स्वावलंबी बनने में मदद करें।
डॉ.आर.के.एस.तिवारी अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने बताया कृषि छात्रों में व्यक्तित्व क्षमता निर्माण करना तथा बेहतर कैरियर एवं व्यवसाय की संभावनाएं तलाशना आज के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. जी.के. श्रीवास्तव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं अध्यक्ष कैरियर डेवलपमेंट सेंटर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने कहा अपने जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है लेकिन सभी को एक जैसी सफलता मिले यह जरूरी नहीं। जिंदगी में सफल होने का एक ही रास्ता है सही समय पर सही कैरियर का चुनाव।

डॉ.एस.के. सोम, पीआई एवं हेड, इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन मैनेजमेंट डिवीजन, नार्म, हैदराबाद ने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास हेतु मुख्यमंत्री परियोजना को 2 वर्ष आगे बढ़ाने की घोषणा की एवं राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय द्वारा इसी तरह के प्रयास की अपेक्षा करते हुए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। सेमिनार संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स व युष्मा साव ने किया। दो दिवसीय सेमिनार में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र- छात्राओं ने सहभागिता की। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी व छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आत्मविश्वास से मिलती है सफलता

विशिष्ट अतिथि आनंद मिश्रा, सदस्य प्रबंध मंडल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने कहा की कैरियर में सफल होने के लिए आत्मविश्वास होना जरूरी है। विश्वविद्यालय इस प्रकार के आयोजन कर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण एवं प्रेरणा देकर अच्छा प्रयास कर रहा है। हम रोजगार देने वाले बने ना कि पाने वाले छत्तीसगढ़ में कृषि स्नातकों के लिए अपार संभावना है बस आवश्यकता है कि हम सही समय पर अवसर को प्राप्त करें। प्रगतिशील राघवेंद्र सिंह चंदेल ने इस अवसर पर कहा कि व्यवसाय के सफल होने के लिए दृढ़ निश्चय का होना जरूरी है। स्व- सहायता समूह बनाकर प्रयास करने से सफलता जल्दी प्राप्त हो सकती है।

नवनिर्मित टिशू कल्चर लैब एवं विषाणु सूचीकरण लैब का लोकार्पित

डॉ. एम.पी.ठाकुर, अधिष्ठाता कृषि संकाय, कृषि महाविद्यालय रायपुर ने कहा कृषि में अपार संभावनाएं हैं। कृषि व्यवसाय हमें भोजन प्रदान करता है। जीवन में कोई भी कार्य असंभव नहीं है। बस प्रयास पूर्ण निश्चय से करना चाहिए तभी आप सफल हो सकते हैं। डॉ. गिरीश चंदेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत महाविद्यालय में नवनिर्मित टिशू कल्चर लैब एवं विषाणु सूचीकरण लैब का लोकार्पण किया।

विशेषज्ञों ने बताये गु

दो दिवसीय सेमिनार के प्रथम दिवस तकनीकी सत्र में कुमार निशांत, भारतीय वन सेवा, डीएफओ बिलासपुर ने “कृषि छात्रों के लिए भारतीय वन सेवा परीक्षा में संभावनाएं विषय पर”, डॉ. श्रद्धा सिंह ठाकुर फाउंडर एवं सीईओ गो ऑर्गेनिक गो बिलासपुर ने “कृषि में उद्यमिता विकास”, तरुण कुमार साहू, डायरेक्टर एग्री युग इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड ने “कृषि उद्यम कैसे प्रारंभ करें”, दीपक यादव, केवायएस वेजिटेबल ने “भारत के विभिन्न प्रदेशों में सब्जियों के विपणन की संभावना”, रूप सिंह मैत्री कृषि अन्वेषण ने “भारत में कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं की झलक, नौकरियां एवं शैक्षणिक योग्यता”, दीना थकंचन ने “कृषि स्नातकों को उच्च शिक्षा हेतु विदेशों में संभावनाएं” विषय पर व्याख्यान दिया ।