उपभोक्ता मांग तो दूर, पूछ-परख तक नहीं

भाटापारा। रंग-गुलाल और पिचकारियों को अब उपभोक्ता मांग का इंतजार है, लेकिन बाजार की स्थितियां हैरान कर रहीं हैं क्योंकि पूछ-परख तक नहीं है। इसके पीछे महंगाई एक वजह तो मानी ही जा रही है साथ ही माह के मध्य में त्यौहार का पड़ना दूसरी वजह माना जा रहा है। फिर भी बेहतर की उम्मीद में है यह बाजार।

संक्रमण के दौर से उबरते बाजार में होली का पर्व उम्मीद की किरण बनकर आ रहा है। 18 मार्च को रंगोत्सव के लिए पिचकारियों और रंग-गुलाल की दुकानों में अब उपभोक्ता मांग का इंतजार है। लेकिन रंग में भंग डालने के लिए महंगाई ने इसमें भी असर दिखा दिया हैं। हर जरूरी सामग्रियों की तरह रंग-गुलाल और पिचकारियों में भी कीमत बढ़ चुकी है। हताश करने वाली ऐसी स्थिति के बाद भी उम्मीद है अच्छे दिन की, इस कारोबार को।

महंगी पड़ेगी खरीदी पिचकारी की

पेट्रोलियम प्रोडक्ट में अहम स्थान रखने वाले प्लास्टिक के रॉ- मटेरियल की कीमतों में वृद्धि का असर पिचकारियों पर भी पड़ा है। रिकॉर्ड 20 प्रतिशत की वृद्धि के बाद इसकी खरीदी महंगी पड़ेगी। इस तेजी से उपभोक्ता मांग में कमी आ सकती है। ऐसी सोच रखने वाले इस बाजार को फिर भी मांग बेहतर निकलने की उम्मीद है।महंगे हुए रंग- गुलाल

महंगे हुए रंग- गुलाल

हर्बल गुलाल और रंग की बढ़ती हिस्सेदारी के बावजूद परंपरागत रंग अभी भी अपनी जगह मजबूती से जमा हुआ है, वजह है इसकी कीमत का कम होना। लेकिन इसमें भी 10 से 12 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है, तो हर्बल रंग और गुलाल में भी 20 प्रतिशत की बढ़त की खबर है। इसलिए इसकी खरीदी रिटेल काउंटरों ने सतर्क रहते हुए की है।

उपभोक्ता मांग शून्य

कारोबार का मानना है कि रंग- गुलाल की पूछ-परख और खरीदी अब महज दो दिन की रह गई है। सीमित अवधि में जैसी स्थितियां बनी हुई है, उसमें और गिरावट के आसार हैं क्योंकि होली का त्यौहार माह के मध्य की तारीख में है। यह दिन नौकरीपेशा वर्ग के लिए तंगी के दिन माने जाते हैं।

मिलेंगे इस कीमत पर

1 सप्ताह बाद आ रहे होली के लिए 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद पिचकारियां 5 रुपए से लेकर 2000 रुपए की रेंज में उपलब्ध है। रंग-गुलाल में 10 रुपए से लेकर 250 रुपए में खरीदी की जा सकती है। हर्बल गुलाल और रंग में कीमत 80 से 250 रुपए किलो बताई जा रही है।