सरकार ने तय किए 15 रुपए प्रति किलो दाम
लघु वनोपज की सूची में 9 नए नाम
बिलासपुर। लघु वनोपज में पहली बार छिंद की घास समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। महुआ का कच्चा फूल भी संग्राहक बेच सकेंगे। इसके अलावा सात ऐसे और वनोपज हैं जिन्हें भी लघु वनोपज की सूची में जगह मिली है। नौ और नए नाम के बाद अब समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपज की सूची में 61 नाम हो गए हैं।
धीरे-धीरे ही सही लेकिन वनोपज में ऐसे नाम भी शामिल हो रहे हैं, जो अब तक गुमनाम ही थे। निश्चित ही यह फैसला उनको लाभ पहुंचाएगा जो वनोपज के सहारे ही जीवन यापन कर रहे हैं। जो नाम पहली बार इस सूची में जोड़े गए हैं, उनमें छिंद की घास चौंकाने वाला नाम है क्योंकि अब तक इससे बनने वाली झाड़ू केवल ग्रामीण अंचल तक ही सीमित थी। नए फैसले के बाद इसे शहर के बाजार में पहचान मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्र की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसलिए छिंद के पत्ते
प्रदेश में छिंद के पेड़ बहुतायत में हैं। शहरों से लगे ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में, जंगलों में इसके पेड़ अच्छी-खासी संख्या में हैं लेकिन उपयोगी होने के बावजूद इसकी घास से बनने वाली झाड़ू को वैसी पहचान नहीं मिली है, जैसी उड़ीसा से आने वाली घास से बनने वाली झाड़ू की पहचान है। लिहाजा समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था इस ओर बढ़ता हुआ कदम बताया जा रहा है। इससे वनवासियों की आय तो बढ़ेगी ही, साथ ही छिंद के पेड़ों का संरक्षण और संवर्धन भी किया जा सकेगा।
पहली बार महुआ का कच्चा फूल
जिन नौ नये वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी, उसमें महुआ का कच्चा फूल भी शामिल है। अभी तक महुआ के संग्राहक, संग्रहण कर, सुखाने के बाद इसका विक्रय करते रहे हैं लेकिन नई व्यवस्था के तहत संग्रहण के फौरन बाद, इसे बेचा जा सकेगा। कीमत अभी भले ही कम है लेकिन इसका लाभ संग्राहकों को निश्चित ही मिलेगा। बताते चलें कि राज्य के हर जिले में महुआ के पेड़ हैं और इनसे हासिल होने वाले महुआ को बाजार भी अच्छा मिल रहा है।
नए नाम और खरीदी की दर
जिन नौ वनोपज की खरीदी, लघु वन उपज की सूची के तहत की जाएगी है, उसमें बाल हर्रा 30 रुपए किलो, महुआ का कच्चा फुल 10 रुपए किलो, छिंद के पत्ते 15 रुपए किलो, कोदो काला 30 रुपए किलो, कोदो भूरा 30 रुपए किलो, रागी 33 रुपए 77 पैसे किलो, अमचूर सफेद 120 रुपए किलो और अमचूर भूरा 80 रुपए किलो की दर पर लघु वनोपज सहकारी समितियां खरीदी करेंगी।



