“दिव्यांग” प्रशासन के कारण कल्याणकारी योजनाओं से वंचित है बीमार बेटी
रतनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर पहुंचे मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल से शहर की 32 वर्षीय ज्योति ने मुलाकात कराई गई। वो सिकल सेल से पीड़ित है। मंगू भाई ने उसे सिकल सेल कार्ड दिया। राज्यपाल मंगू भाई ने विनम्रता से उसे सुना। परिवार की स्थिति पर चर्चा की। इलाज के संभावनाओं के बारे में भी बताया।
घोर निराशा के अंधेरे में डूबी ज्योति की कद-काठी आठ-दस साल के बच्चों के बराबर तो सूजा चेहरा 70 साल की दादी की तरह। वो बेटी से दादी हो चली है। उसके सपनों का संसार सिकल सेल के ब्लेक होल में खो गया है। कृषक मजदूर माता-पिता के चार संतानों में बड़ी ज्योति के दो छोटी बहनें और भाई की शादी हो चुकी है। जिनका अब अपना भरा-पूरा खुशहाल संसार है। ज्योति का संसार अब मजदूर मां-बाप और उसका घर-आंगन है। जो उसके दर्द भरें लंबे जीवन यात्रा की उम्मीद है। कुछ उम्मीदें सरकार और शासन की बहुत प्रचारित कल्याणकारी योजनाओं से भी हैं। जो आज तक उस तक नहीं पहुंची है। शारीरिक रूप से पूरी तरह लाचार 32 साल की ज्योति तक आने में सरकार की सभी कल्याण कारी योजनाएं और पूरा सिस्टम,,”दिव्यांग” है। समय-समय पर सरकार गांव-गांव, घर-घर सुराज लेकर जाती है। इस बिटिया के पास उनको देने के लिए वो “परवाना” नहीं है, जिसके मिलने पर सरकार के अफसर इसके जीवन में भी सरकारी मदद की मुट्ठी भर राहत दिला सके। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में पड़ोसी राज्य के राज्यपाल की उपस्थिति में सत्कार के लिए बिलासपुर जिले के कलेक्टर अवनीश शरण और कोटा ब्लॉक के अनुविभागीय अधिकारी सहित स्वास्थ्य व पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। इन पर ही जिले और विकास खंड के गांवों के पात्र व जरुरतमंद लोगों को सरकार और शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी बनाने की है । इस बिटिया तक सरकार की योजनाओं के लाभार्थी बनाने मरहम पर फोहे रखने की पहल करने की जहमत जिम्मेदारों ने नहीं की ! इस तंत्र में नंबर कर्तव्य परायणता में नहीं “सत्कार” से बढते हैं ? आज ही तो संविधान को आत्मसात करने के 75 साल भी पूरे हुए। है न ….
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