कर्नाटक में नई फसल को बारिश से नुकसान

महाराष्ट्र की फसल में 15 दिन का विलंब

बिलासपुर। अरहर की तैयार फसल को बारिश ने नुकसान पहुंचाया। महाराष्ट्र की फसल की आवक में एक पखवाड़े का विलंब हो सकता है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की फसल मार्च में ही आएगी। यह तीन स्थितियां दलहन में तेजी का माहौल बना चुकी हैं। सो, मांग के शिखर पर रहने वाली अरहर की दाल सैकड़ा के करीब पहुंच रही है।

खरीफ के बाद रबी सत्र में दो बार हुई बारिश का असर अब दिखाई देने लगा है। दलहन की खेती का रकबा अपने प्रदेश में लगातार बढ़त ले रहा है लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हम आज भी कर्नाटक और महाराष्ट्र पर ही निर्भर हैं। इनमें से कर्नाटक ऐसा राज्य है, जहां की फसल सबसे पहले आती है। इस बार, यहां बीते सप्ताह हुई बारिश ने तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। खबरों के मुताबिक गुणवत्ता में संभावित नुकसान को देखते हुए अब महाराष्ट्र का इंतजार है।

15 दिन विलंब से

निर्धारित समय याने फरवरी मध्य तक आने वाली महाराष्ट्र की फसल अब फरवरी के अंत तक आने की संभावना है क्योंकि बारिश से यहां भी फसल नुकसान के घेरे में है। आ रही खबरों के मुताबिक नुकसान का प्रतिशत ज्यादा नहीं है, लेकिन कर्नाटक की फसल खराब होने के बाद, मांग का दबाव महाराष्ट्र पर ही पड़ने की संभावना से इनकार नहीं है।

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश की फसल मार्च में

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की दलहन फसल हमेशा से मार्च के पहले पखवाड़े में आती है। मिल रही खबरों के मुताबिक इन दोनों प्रदेशों में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, लेकिन घरेलू मांग के लिए बाजार को महाराष्ट्र की मदद लेनी ही पड़ेगी। इसकी वजह से दलहन की सभी किस्मों में तेजी का दौर चालू हो गया है। चना और उड़द की दाल के सिवाय सभी में भाव शतक के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं।

बेहद करीब

कर्नाटक और महाराष्ट्र से आ रही खबर के बाद, अरहर की दाल चिल्हर में 90 से 95 रुपए किलो पर पहुंच गई है। मसूर की दाल 90 से 100 रुपए किलो, तो मूंग दाल धुली 100 से 105 रुपए किलो पर पहुंच चुकी है। अलबत्ता उड़द दाल धुली 90 से 95 रुपए पर स्थिर है। इन दोनों की छिलका वाली दाल 75 से 85 रुपए किलो पर बिक रही है। चना दाल में 65 से 70 रुपए किलो पर खरीदी की खबर है।