खपत बढ़ते ही डेयरियां अलर्ट मोड पर
भाटापारा। हर रोज नौ हजार लीटर उत्पादन और खपत के साथ दूध का बाजार इस समय अपने सबसे बेहतर समय में पहुंचा हुआ है | लाक डाऊन की आशंका से दूर यह क्षेत्र अपना पूरा ध्यान उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रयास में है। यही वजह है कि शार्टेज जैसी स्थिति नहीं हैं।
लगभग हर बाजार संक्रमण के इस दौर में आपदा को अवसर में बनाने को लगा हुआ है। ऐसी स्थितियों के बीच डेयरी कारोबार अपना पूरा ध्यान उत्पादन के बाद मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन साधने में लगाए हुए है। सफलता भी मिल रही हैं। यही वजह है कि स्थितियां पूरी तरह हर वर्ग के लिए माकूल बनी हुई हैं। उत्पादन और मांग के बीच जैसा संतुलन बना हुआ है, उससे यही संदेश जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी कम आपूर्ति वाली स्थिति नहीं आयेगी।
मौसम का साथ
मौसम का मिज़ाज जैसा बना हुआ है उससे भी डेयरियों में मांग बनी हुई है | वैसे भी शीत ऋतु के दिनों में यह कारोबार दुग्ध उत्पादन के बाद मांग के दबाव के बीच काम करता रहा है लेकिन इस बार यह दबाव कुछ ज्यादा ही बढ़ा हुआ नजर आ रहा है | शायद यह पहला साल होगा जब उत्पादन और मांग का स्तर बराबरी पर ठहरा हुआ हैं |
यहाँ से भी मांग निरंतर
शादियों की करीब आ चुकी तारीखें कारोबार को गति दे रहीं हैं तो दुग्ध उत्पादन में भी मांग निकली हुई है | सबसे ज्यादा मांग पनीर में बनी हुई है | फास्ट फूड सेंटर की डिमांड से डेयरियों में सब कुछ समान्य है तो चाय और काफी के लिए दूध की मांग बढ़त लेती नजर आती है |कहा जा सकता है कि डेयरियों को बाजार से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है |
उत्पादन और मांग
खंड क्षेत्र में बढ़ती डेयरियों की संख्या और निरंतर मांग के बाद इस समय प्रतिदिन दुध का उत्पादन लगभग नौ हजार लीटर के आसपास है | मांग भी इतने की ही बनी हुई है | डेयरियां उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में हैं लेकिन इस पर मांग की स्थिति को देखने के बाद ही काम करने की योजना है | बहरहाल इस क्षेत्र में आया यह सुखद बदलाव, स्वर्णकाल की ओर बढ़ता पहला कदम माना जा सकता हैं |


